रायपुर : देश में आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है। महिलाओं के सशक्तिकरण की बातें हो रही हैं। छत्तीसगढ़ में भी महिलाओं का सम्मान किया जा रहा है। इसके उलट नवारायपुर के एनआरडीए कार्यालय के सामने करीब तीन महीने से महिलाएं आंदोलन पर बैठी हुई हैं। महिला सशक्तिकरण की तस्वीर राजधानी रायपुर की है। ये वो महिलाएं हैं जो किसान परिवार से आती हैं। इनकी मांगे अपने हक को लेकर है, वो नवारायपुर में सरकार द्वारा अधिग्रहीत की गई जमीनों का मुआवजा मांग रही हैं। बेघर हुए परिवार के बालिग सदस्यों के लिए नौकरी मांग रही हैं। उनकी मांगों पर सरकार ने विचार करने की बात भी कही है। इन सभी मांगों को लेकर सरकार की उदासीनता से आहत होकर यहाँ की महिलाओं नें क्रमिक भूख हड़ताल करने का निर्णय लिया है। और ये महिलाएँ भूख हड़ताल पर बैठ गई हैं।

अब आइए गौर करते हैं राजधानी रायपुर में आज सुबह हुए महिला सशक्तिकरण की साइकिल रैली पर। राजधानी में शहर की महिलाएं सुबह से ही शंकरनगर के बीटीआई मैदान में जुटी थी, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक उनका हौसला बढ़ाने वहां पहुंची थीं। लेकिन वो नवारायपुर की उन महिलाओं को भूला बैठी जो अपने हक के लिए वहां आंदोलन पर मासूम बच्चों को लिए अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर भूखी बैठी हैं। महिला दिवस पर महिला सशक्तिकरण की ये तस्वीर कुछ अलग कहानी कह रही है।

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आपको बता दें कि अपने आंदोलन के तहत किसानों ने मंगलवार से से आमरण अनशन पर बैठने की निर्णय ले लिया है। अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नई राजधानी प्रभावित किसान कल्याण समिति की 12 महिलाएँ क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठी हुई हैं। इनमें मीना यादव, डेरहिन बाई धींवर, रूखमणी बाई सेन, जुगवा बाई पाल, तारा साहू, बैजनत्री बाई, लक्ष्मी खुंटे, शांति बाई पाण्डेय, तोमिन निर्मलकर, रमा बाई पाल, नीरा बाई साहू, इन्द्रतीन बाई साहू वो महिलाएं हैं जो अपना हक मांग रही हैं।

राज्य महिला आयोग अब तक इन महिलाओं तक नहीं पहुँच पाया है। इन महिलाओं को उम्मीद है कि सरकार आज नहीं तो कल उनकी मांगों को जरूर पूरा करेगी। फिलहाल आज तो पूरी राजधानी महिला दिवस की खुमार में डूबी है, लेकिन इन महिलाओं ने अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है। गांव की इन महिलाओं को ही सही मायने में सशक्तिकरण की जरूरत है तभी अंतर्राष्ट्रीय महिला महिला दिवस को सफल माना जा सकता है।

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