एक सीट ऐसी जहां पिता-पुत्र थे आमने-सामने, दोनों को मिली हार, बेटे की हुई जमानत जब्त

टीआरपी डेस्क। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में एक सीट ऐसी थी जहां पिता-पुत्र दोनों ही चुनाव लड़ रहे थे। पिता भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे और बेटा निर्दलीय मैदान में था। लेकिन मतदाताओं ने दोनों को ही नकार दिया।

बेटे की तो जमानत तक जब्त हो गई, जबकि पिता जी थोड़ा जीत के लिए संघर्ष करते थे। दरअसल, पिताजी 2017 में जीते थे और चुनाव के समय विधायक थे। इसलिए वह इस चुनावी जंग में दूसरे नंबर रहे।

ये अनोखा मामला है मुरादाबाद जनपद की कांठ विधानसभा सीट पर। कांठ विधानसभा से पिता और बेटा दोनों हार गए। भाजपा प्रत्याशी और विधायक राजेश कुमार चुन्नू और निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले उनके बेटे दुष्यंत सिंह को जनता ने अपना आशीर्वाद नहीं दिया। राजेश चुन्नू को करीब 90,280 मत मिले हैं, जबकि उनके बेटे दुष्यंत सिंह को मात्र 452 वोट मिले। दुष्यंत की जमानत जब्त हो गई। कांठ से सपा के प्रत्याशी कमाल अख्तर जीते हैं। एक तरह से उनके पिता के हिस्से का वोट ही दुष्यंत को मिले। पिता और पुत्र के हारने की चर्चा खूब रही।

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बता दें कि भारतीय जनता पार्टी ने काेरोना की मुसीबतों को पार करके दो जून की रोटी के लिए मार्च तक राशन देने की व्यवस्था की थी। इसके जरिए महिलाओं ने पूरे प्रदेश में भाजपा के समर्थन में मतदान भी किया। लेकिन, मुरादाबाद जिले में भाजपा की राशन दिए जाने की योजना का कोई लाभ मिलता नजर नहीं आया। मुरादाबाद की सभी विधानसभा सीटों में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कुंदरकी और मुरादाबाद देहात क्षेत्र में कई मुस्लिम परिवार का सियासत में दबदबा रहा है।

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