नवसंकल्प चिंतिन शिविरः पार्टी ने हमें बहुत कुछ दिया है, अब समय है कर्ज उतारने का, खुलकर विचार रखें नेता- सोनिया गांधी

टीआरपी डेस्क। करीब 9 साल बाद कांग्रेस का चिंतन शिविर उदयपुर में जारी है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा लोकसभा और विधानसभा चुनाव को लेकर चुनावी रणनीति तैयार किया जाना है। कांग्रेस उन सीटों पर अलग रणनीति तैयार करने पर गंभीरता से विचार कर रही है, जहां 1 लाख या इससे ज्यादा वोट से हार का सामना करना पड़ा। राजस्थान के लिहाज से ये रणनीति इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 25 में से 23 सीटों पर 1 लाख या इससे अधिक वोटों से हारी थी।

राजस्थान में वर्ष 2014 और 2019 दोनों ही बार कांग्रेस को सभी 25 सीटें गंवानी पड़ी थीं। राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है, ऐसे में आलाकमान को अगले लोकसभा चुनाव में यहां से काफी उम्मीदें हैं। वहीं आज इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ‘नवसंकल्प चिंतिन शिविर’ की शुरुआत के मौके पर पार्टी में बड़े सुधार की बात की और नेताओं का आह्वान किया कि वे ‘विशाल सामूहिक प्रयासों के जरिये पार्टी में नई जान फूंकें क्योंकि अब पार्टी का कर्ज उतारने का समय आ गया है।

उन्होंने कहा, “हमारे महान संगठन की ओर से समय समय पर लचीलेपन की उम्मीद की जाती रही है। एक बार फिर हमसे उम्मीद की जा रही है कि हम अपना समर्थन और साहस की भावना का परिचय दें।” सोनिया गांधी ने कहा, “हमारे संगठन के समक्ष परिस्थितियां अभूतपूर्व हैं। असाधारण परिस्थितियों का मुकाबला असाधारण तरीके से किया जाता है… हमें सुधार की सख्त जरूरत है। रणनीति में बदलाव की जरूरत है। रोजाना काम करने के तरीके में परिवर्तन की जरूरत है।” उन्होंने कहा, “मैं यह भी जोर देकर कहना चाहती हूं कि विशाल सामूहिक प्रयासों से ही हमारा पुनरुत्थान हो सकता है।”

सोनिया गांधी ने कांग्रेस नेताओं का आह्वान किया, “पार्टी ने हमें बहुत कुछ दिया है। अब समय है कर्ज उतारने का. हम अपने विचार खुलकर रखें। लेकिन सिर्फ संगठन की मजबूती, दृढ़निश्चय और एकता का संदेश बाहर जाना चाहिए.” राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, “भाजपा के लिए लोकतंत्र कोई मायने नहीं रखता. ऐसे फासीवादी लोग धर्म का नाम लेकर सत्ता पर काबिज हो गए।”

उन्होंने सांप्रदायिक झडप़ों की हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा और कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में शांति की अपील करने का नैतिक साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। उनके पास नैतिक साहस नहीं है।” गहलोत ने कहा, “हम काम करते हैं, मार्केटिंग नहीं करते। लेकिन ये फासीवादी लोग काम कुछ नहीं करते, सिर्फ प्रचार करते हैं।”

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