Saturday, May 21, 2022
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निलंबित पटवारी ने अधिकारियों पर प्रताड़ना का आरोप लगाकर मांगी इच्छा मृत्यु, प्रशासन ने इसे छवि धूमिल करने का बताया प्रयास

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दंतेवाड़ा। निलंबित की गई महिला पटवारी ने अधिकारियो पर आर्थिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए शासन से इच्छा मृत्यु की मांग कर डाली। यह मामला संज्ञान में आते ही दंतेवाड़ा जिला प्रशासन ने महिला पटवारी के कथन को झूठा करार देते हुए इसे प्रशासन की छवि धूमिल करने का प्रयास बताया है।

जिला प्रशासन दंतेवाड़ा द्वारा जारी प्रेस नोट में जानकारी दी गई है कि दिनांक 13 मई को श्रीमती लल्ली मेश्राम, निलंबित पटवारी हल्का नंबर 11 कुम्हाररास के द्वारा राज्यपाल, छत्तीसगढ़ शासन को संबोधित आवेदन पत्र जिसकी प्रतिलिपि मुख्यमंत्री छ0ग0 शासन, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग तथा कलेक्टर जिला दंतेवाड़ा को अग्रेषित की गई है, जिसमें श्रीमती मेश्राम द्वारा एसडीएम एवं तहसीलदार दंतेवाड़ा पर आर्थिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ना का अनर्गल आरोप लगाते हुए इच्छामृत्यु की अनुमति प्रदान करने आवेदन किया गया है एवं यह आवेदन सोशल मीडिया में भी अपलोड किया गया है।

इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा द्वारा अवगत कराया गया है कि चूंकि श्रीमती मेश्राम के द्वारा शासकीय नियम एवं प्रक्रिया अनुसार किये गये स्थानांतरण कार्यवाही तथा उपरांत किये गये कार्यवाही पर आरंभ से जिला प्रशासन पर अनर्गल आरोप लगाते हुए पत्राचार करना, आचरण नियमों के विरूद्ध कृत्य करना तथा अधिकारियों की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जाता रहा है। 02 वर्ष से अधिक अवधि से एक ही स्थान पर कार्यरत पटवारियों को अन्य हल्के में स्थानांतरण करने के शासन के निर्देश के तहत् अनुविभाग दंतेवाड़ा के पटवारियों को पदस्थ हल्के से अन्य हल्के में पदस्थापना किया गया है।

10 वर्षों से एक ही स्थान पर

लल्ली मेश्राम के विगत 10 वर्षाे से एक ही हल्के में कार्यरत होने पर अन्य हल्के में स्थानांतरण किया गया, किन्तु उसके द्वारा नवीन पदस्थापना में कार्यभार ग्रहण नहीं करते हुए तथा एवजीदार कर्मचारी को ग्राम राजस्व रिकार्ड न सौंपते हुए अनाधिकृत रूप से अपने कब्जे में रखा गया तथा अनर्गल शिकायत किया जाता रहा। ग्रामवासियों से शिकायत प्राप्त होने पर तथा उनके द्वारा रिकार्ड नहीं सौपे जाने पर, आचरण नियमों के विपरीत कृत्य पर अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए सेवा से निलंबित किया गया। लल्ली मेश्राम के द्वारा निलंबन पर नियत मुख्यालय में भी आज दिनांक तक अपनी उपस्थिति नहीं दी गई है। साथ ही निलंबित कर्मचारी द्वारा अन्यत्र कोई कार्य नहीं करने संबंधी प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं करने के कारण निर्वाह भत्ता भी तैयार नहीं किया जा सका है। इस संबंध में बताये जाने पर उनके द्वारा आर्थिक व मानसिक प्रताड़ना का अनर्गल आरोप जिला प्रशासन पर लगाया जा रहा है। विभागीय जॉंच में भी इनके द्वारा सहयोग नहीं किया जा रहा है।

हाई कोर्ट ने तबादले को सही माना

स्थानांतरण के संबंध में लल्ली मेश्राम द्वारा उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर में एक याचिका भी दायर की गई थी। मगर न्यायालय ने भी प्रशासन के द्वारा की गई कार्यवाही को नियमानुकुल माना है। जिला प्रशासन ने इन तथ्यों का खुलासा करते हुए पटवारी लल्ली मेश्राम द्वारा एसडीएम व तहसीलदार पर लगाये जा रहे आरोप पूर्णतः असत्य एवं बेबुनियाद बताया है। संबंधित के विरूद्ध की गई कार्यवाही शासन के नियमानुसार है। प्रशासन ने कहा है कि लल्ली मेश्राम द्वारा इस प्रकार का पत्राचार कर सिविल सेवा आचरण नियम 21 का स्पष्ट उल्लंघन किया गया है। उसके द्वारा प्रताड़ित किये जाने का आरोप पूर्णतः निराधार एवं असत्य है।
निलंबित पटवारी लल्ली मेश्राम द्वारा लिखा गया पत्र :

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