600 साल पहले राजा ने अपने किले की सुरक्षा के लिए खुदवाया था राजधानी का सबसे विशाल तालाब

रायपुर। राजधानी रायपुर को यूं तो तालाबों की नगरी कहा जाता है। यहाँ ऐसे तो बहुत से तालाब हैं। मगर उन तालाबों से भी दिलचस्प हैं तालाबों से जुड़े किस्से और कहानियां।

राजधानी में एक ऐसा तालाब भी है जो 600 साल से रायपुर के मध्य स्थित है। यह तालाब बूढ़ातालाब या विवेकानंद सरोवर के नाम से प्रसिद्ध है। इसका अपना एक अलग ही इतिहास है। कहा जाता है कि इस तालाब को कल्चुरि राजवंश के राजाओं ने खुदवाया था। तालाब में मिले शिलालेख के मुताबिक 1402 में बूढ़ातालाब बनवाया था। करीब 600 साल पुराने बने इस तालाब पर राजा भुवनेश्वर ने आगे चलकर विकसित करते हुए घाट बनवाए थे। हालांकि अब वह घाट दिखाई नहीं देते, लेकिन तालाब को विकसित करने में राजा भुवनेश्वर की महती भूमिका मानी जाती है।

किले के साथ हुआ था तालाब का निर्माण

बूढ़ातालाब को राजाओं ने अपने किले की सुरक्षा के लिए खुदवाया था। इतिहासकारों की मानें तो कल्चुरि राजा ब्रह्मदेव ने खल्लारी को छोड़कर रायपुर से सटी खारुन नदी के समीप अपनी राजधानी बसाई थी। उसके बाद रायपुर के बूढ़ातालाब के पास नई राजधानी बनाई, जहां उन्होंने किले के साथ तालाब भी खुदवाया। इतिहासविद् कहते हैं कि भोसले कालीन रघुजी राव भोसले के दस्तावेजों के मुताबिक किले के नीचे बूढ़ा तालाब पूरब खाई के नीचे होने के उल्लेख मिलते हैं।

1460 में घाट की पुनः स्थापना हुई

इतिहासकार बताते हैं कि बूढ़ातालाब एक विशालकाय तालाब है। हालांकि तालाब के निर्माण के बाद राजा भुवनेश्वर ने घाट का निर्माण किया है। उसके बाद पुनः 1460 में लोगों के स्नान के लिए घाट का निर्माण किया गया। उसके बाद लगातार नव निर्माण के कार्य होते आए हैं।

सप्रे, दानी गर्ल्स स्कूल पहले था बगीचा

जानकारी की मुताबिक सप्रे शाला मैदान व दानी गर्ल्स स्कूल में बगीचा हुआ करता था। वहां बड़े-बड़े नारियल के साथ आम के भी पेड़ हुआ करते थे। अंग्रेजों समेत विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले लोगों के लिए पर्यटन की दृष्टि से यह मुख्य केंद्र बिंदू था।

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