Raipur : जायसवाल निको इंडस्ट्रीज की जनसुनवाई में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, बीच में रोकनी पड़ी कार्रवाई… देखें वीडियो

रायपुर : राजधानी के सपीप स्थित सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र के जयसवाल निको प्लांट में उद्योग विस्तार को लेकर जन सुनवाई रखी गई थी जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, स्थानीय लोग उपस्थित थे। ग्रामीणों की जन सुनवाई में उपस्थिति देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिए गए थे।

जैसे ही जनसुनवाई प्रारंभ हुई फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से प्रतिनिधी ने कहा कि प्लांट प्रबंधन की ओर से आस-पास के गांव में खेल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी, ग्रीन बेल्ट जैसे मुद्दों पर ध्यान देकर सकारात्मक कार्य किया गया है। इसके साथ ही प्लांट में काम करने वालों में 70% स्थानीय लोगों को रोजगार दिया गया है। इतनी बात सुनते ही जनसुनवाई में आए ग्रामीण बिफर गए। दरअसल उनका कहना है कि ये सारी बातें सफेद झूठ हैं। कंपनी ने कोई इनमें से कोई भी काम ढंग से नहीं किया है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा कि “प्रबंधन के द्वारा खेल के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं दी गई है। सीएसआर फंड के तहत कामचलाऊ क्लीनिक खोली गई थी वह भी कई सालों से बंद ही रहती है। उद्योग के कारण क्षेत्र के गांव में पानी की व्यवस्था भी बिगड़ गई है। कई नलकूप खराब हो चुके हैं। आयरन युक्त पानी की अधिकता है जो कि पीने लायक नहीं हैं। ग्रीन बेल्ट के नाम पर पौधे तो रोपे गए हैं लेकिन उनका अता पता नहीं है।”

इन सब आरोपों के साथ ग्रामीण लगातार हंगामा करने लगे जिसके कारण जनसुनवाई की कार्रवाई बीच में ही रोकनी पड़ी। दरअसल कंपनी का प्रबंधन अपने किये गलत कामों के कारण घिर गया था। जिसकी वजह से उन्होंने जनसुनवाई को बीच में रोक दिया।

पात्र किसानों को भी नहीं मिली नौकरी

जन सुनवाई के दौरान क्षेत्रीय ग्रामीण बड़ी संख्या में प्रमाण पत्र लेकर पहुंचे थे। उनका कहना था कि उनकी जमीन निको इंडस्ट्रीज के अंतर्गत निकल गई लेकिन उन्हें अब तक कंपनी ने नौकरी नहीं दी। अब तक कुछ मिला तो सिर्फ झूठा दिलासा। फैक्ट्रियों के कई चक्कर काटने के बाद भी मामले का कोई निराकरण नहीं हो पाया। जमीन भी गई और हाथ भी खाली रह गए।

निराश होकर लौटे वापस

नौकरी की आस में प्रमाण पत्र लेकर पहुंचे किसानों के सवालों पर फैक्ट्री प्रबंधन गोलमोल जवाब देने लगा। जिससे किसानों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जनसुनवाई का भारी विरोध करना चालू कर दिया। जिसके चलते अधिकारीयों के द्वारा घंटे भर में ही जनसुनवाई समाप्त कर दी गई। जिसके कारण जनसुनवाई का कोई परिणाम नहीं निकल सका और ग्रामीणों को निराश होकर लौटना पड़ा।


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राष्ट्रीयअब तक 16 देशों में मिल चुके Monkeypox के 220 मरीज, भारत…राष्ट्रीय

अब तक 16 देशों में मिल चुके Monkeypox के 220 मरीज, भारत में संक्रमण को लेकर केंद्र ने जारी की चेतावनी !

ByTRP DeskMay 25, 2022Share

अब तक 16 देशों में मिल चुके Monkeypox के 220 मरीज, भारत में संक्रमण को लेकर केंद्र ने जारी की चेतावनी !

TRP डेस्क : दुनिया भर में फैली कोरोना महामारी के बीच अब Monkeypox नाम की बीमारी भी तेजी से बढ़ती नजर आ रही है। हालांकि भारत देश में अभी तक इस बीमारी का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। लेकिन 16 देशों में फैलने के बाद आप भारत में भी इस बीमारी को लेकर सावधानियां बढ़ा दी गई हैं। इस बीमारी के 220 मरीज अब तक दुनिया भर में मिल चुके हैं। भारत में इस बीमारी से निपटने की अग्रिम तैयारियों के रूप में केंद्र सरकार में इस बीमारी को लेकर “नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल” और “इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च” को अलर्ट रहने के निर्देश जारी कर दिए हैं। मंकीपॉक्स को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने भी चेतावनी जारी की है। जिन देशों में यह संक्रमण नहीं फैला है वहां भी इसके अधिक मामले सामने आने की संभावना विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जताई है। WHO ने कहा है कि यह बीमारी ज्यादातर यौन शारीरिक संबंध बनाने के कारण फैल रही है।

क्या है Monkeypox ?

मंकीपॉक्स एक ऑर्थोपॉक्स वायरस का संक्रमण है जो चेचक बीमारी के जैसा ही होता है। हालांकि यह चेचक की तरह गंभीर नहीं है। मंकीपॉक्स वायरस पॉक्सविरिडे फैमिली के ऑर्थोपॉक्स वायरस जीन से संबंधित है। वर्ष 1958 में मंकीपॉक्स की खोज की गई थी। इस बीमारी के मुख्यतः बंदरों में होने का पता लगा था। विशेषज्ञों की मानें तो मंकीपॉक्स एक जूनोसिस डिसीज है जो अफ्रीका में ज्यादातर जानवरों से इंसानों में फैलती है। इंसान से इंसान में इसका फैलना इतना आम नहीं है क्योंकि ये संक्रमित व्यक्ति के पस या लार के संपर्क में आने से ही फैलता है।

क्यों फैल रहा तेजी से संक्रमण ?

आम तौर पर यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के पस या लार के संपर्क में आने से फैलता है पर वर्तमान में फैल रहे संक्रमण को देखते हुए वैज्ञानिकों ने आशंका जाहिर की है कि यह किसी और तरीके से फैल रहा है। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के संक्रामक रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर जिमी व्हिटवर्थ (Jimmy Whitworth) ने कहा, “हमें तत्काल यह पता लगाना होगा कि क्या मंकीपॉक्स का यह नया वैरिएंट किसी नए माध्यम से फैल रहा है? आमतौर पर मंकीपॉक्स एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में काफी क्लोज कॉन्टेक्ट से फैलता है। यह वायरस किसी सतह, बिस्तर, कपड़े या सांस के द्वारा अंदर जा सकता है। लेकिन त्वचा से त्वचा के संपर्क से इस वायरस से संक्रमण फैलाना सबसे असान है। शायद यह वायरस यौन शारीरिक संबंध बनाने के कारण तेजी से फैल रहा है और इसका पता लगाने की जरूरत है। क्योंकि यदि ऐसा सच में है तो यह वायरस फैलने का नया तरीका है। और इसे जल्द से जल्द रोकना होगा।”

ये हैं Monkeypox के लक्षण

मंकीपॉक्स के लक्षण बुखार, सिरदर्द, शरीर पर दाने और फ्लू जैसे होते हैं। ये लक्षण आम तौर पर 3 सप्ताह तक रहते हैं और उसके बाद स्वतः ही चले जाते हैं। इसके अलावा यह बीमारी शरीर में लिम्फ नोड्स या ग्रंथियों को भी बढ़ा देती है। इस बीमारी से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए अधिकतर लोगों को केवल बुखार, शरीर में दर्द, ठंड लगना और थकान का अनुभव हुआ है। अगर संक्रमण अधिक गंभीर होता है तो चेहरे और हाथों पर दाने और घाव हो सकते हैं। जो धीरे-धीरे शरीर के बाकी हिस्सों में फैल सकते हैं।

भारत में फैलने का कितना है खतरा ?

एड्स सोसायटी ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट डॉ. ईश्वर गिलाडा (Dr. Ishwar Gilada) ने इस वायरस के भारत में फैलने संबंधी सवाल के जवाब में कहा कि, “यह वायरस आम तौर पर जानवरों में फैलता है लेकिन बाद में जानवरों से इंसानों में फैलने लगता है। मंकीपॉक्स एचआईवी की तरह जूनोटिक है जो शुरू में मंकी वायरस के रूप में आया था। इसे सिमियन इम्यूनोडेफिशियेंसी वायरस (Simian immunodeficiency virus) कहा जाता है। ऐसे वायरस जानवरों में फैलते हैं लेकिन इंसानों तक पहुंच जाते हैं।

सौभाग्स से अब तक ऐसे कोई भी प्रमाण नहीं मिले हैं जिससे बह पता लगे कि यह वायरस महामारी का रूप ले सकता है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि मंकीपॉक्स संक्रमण के सभी मामलों का कोई एक सोर्स या कॉन्टैक्ट नहीं मिल रहा है। इसीलिए इसके सेक्सुअल ट्रांसमिशन की संभावना को खंगाला जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि भारत में अभी इस वायरस से घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन इसे लेकर और अध्ययन की आवश्यकता है।

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