दुनिया का पहला विश्वविद्यालय, जहां न तो था कोई सिलेबस न लगती थी फीस…

तक्षशिला विश्वविद्यालय जिसे हम आज तक्सिला नाम से जानते हैं। तक्षशिला प्राचीन भारत में गांधार देश की राजधानी हुआ करता था जो कि शिक्षा का प्रमुख केंद्र था। आज यह विश्वविद्यालय पाकिस्तान के पंजाब रावलपिंडी जिले में स्थित है। यहां विश्व का पहला विश्वविद्यालय स्थापित किया गया था। बता दें कि तक्षशिला को कटस्टोन का शहर भी कहां जाता है। उस समय श्री राम के भाई भरत के पुत्र तक्ष ने तक्षशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।

दुनिया का पहला विश्वविद्यालय, जहां न तो था कोई सिलेबस न लगती थी फीस… शिक्षा का यह केंद्र पाकिस्तान के रावलपिंडी से लगभग 500 किलोमीटर पश्चिम में स्थित था। इसे हिंदू और बौद्ध शिक्षा का केंद्र भी माना जाता था

विश्वविद्यालय में नहीं था कोई सिलेबस

आपको हैरानी होगी कि आज की शिक्षा पद्धति के अनुसार तक्षशिला विश्वविद्यालय में किसी प्रकार का कोई सिलेबस नहीं हुआ करता था। मगर इस विश्वविद्यालय में शिक्षक बड़ी संख्या में छात्रों को पढ़ाया करते थे। तक्षशिला में छात्रों को पूरी तरह से छूट थी कि वह किसी भी शिक्षक से पढ़ सकते हैं। साथ ही अपने पसंद के किसी भी विषय में पढ़ाई कर सकते हैं।

कोई फीस नहीं कोई परीक्षा भी नहीं
आज के समय में ऐसे बहुत से कम विश्वविद्यालयों में जहां बिना फीस के छात्र शिक्षा प्राप्त कर सकता है। पर उस समय तक्षशिला में छात्रों को किसी प्रकार की कोई फीस एवं कोई परीक्षा नहीं देनी पड़ती थी और उस दौर में किसी चीज के बदले ज्ञान बेचे जाने पर नाराजगी जताई जाती थी।

शिक्षक बताते थे, कब होगी शिक्षा पूरी

तक्षशिला की एक और रोचक बात यह है कि यहां कोई ग्रेडिंग सिस्टम नहीं था। साथ ही यहां शिक्षक बताते थे कि छात्र की शिक्षा कब खत्म होगी। हां, शिक्षा के अंत में एक सांकेतिक गुरू दक्षिणा जरूर स्वीकार की जाती थी।

यहां केवल ग्रेजुएशन का सिस्टम

यह यूनिवर्सिटी पोस्ट ग्रेजुएशन स्टडीज का हब थी। तक्षशिला में भर्ती होने से पहले छात्रों को अपनी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा कहीं और से पूरी करनी पड़ती थी। यहां भर्ती के दौरान छात्र की आयु 16 वर्ष अनिवार्य थी। न केवल भारतीय बल्कि चीन, ग्रीस और अरब जैसे आसपास के देशों के छात्र भी यहां शिक्षा लेने आते थे।

दुनिया की कुछ और ऐसी यूनिवर्सिटी
तक्षशिला के अलावा दुनिया में और भी कई पुरानी यूनिवर्सिटीज हैं, जिनमें से कुछ का अस्तित्व खत्म हो चुका है, तो कुछ आज भी मौजूद हैं – नालंदा, सोमापुरा, अल-करौइन, बोलोग्ना विश्वविद्यालय, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय।

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