आईएएस अधिकारी वरदमूर्ति मिश्रा ने सरकारी नौकरी छोड़ने का फैसला किया है।
आईएएस अधिकारी वरदमूर्ति मिश्रा ने सरकारी नौकरी छोड़ने का फैसला किया है।

भोपाल। एमपी कैडर के आईएएस अधिकारी वरदमूर्ति मिश्रा ने सरकारी नौकरी छोड़ने का फैसला किया है। इसके लिए उन्होंने विभाग में आवेदन दिया है। साथ ही सरकारी शर्तों को पूरा भी किया है। मिश्रा का आवेदन अभी स्वीकार नहीं हुआ है। वहीं, कार्मिक विभाग के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने नौकरी छोड़ने के लिए आवेदन दिया है। वरदमूर्ति मिश्रा प्रमोटी आईएएस अधिकारी हैं। वह पहले राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे।

अवार्ड पाने करना पड़ा संघर्ष

दरअसल, वरदमूर्ति मिश्रा को जनवरी 2022 में ही आईएएस अवार्ड हुआ था। वे 1996 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। आईएएस अवार्ड पाने के लिए कैट में उन्होंने याचिका लगाई थी। बताया जाता है कि विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण न होने के बाद उन्हें वरिष्ठता क्रम में पीछे कर दिया गया था। इसकी वजह से उनसे जूनियर अधिकारियों को आईएएस संवर्ग आवंटित हो गया था।

सरकारी फैसलों के खिलाफ गए न्यायालय

वरदमूर्ति मिश्रा अभी खनिज विकास निगम में कार्यकारी निदेशक हैं। अभी रिटायर होने में सात साल बचे हुए हैं। वरदमूर्ति मिश्रा पूर्व में तत्कालीन सीएम कमलनाथ के ओएसडी भी रहे हैं। साथ ही छिंदवाड़ा यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रार भी रहे हैं। उनका कार्यकाल इस दौरान विवादित रहा है। वरदमूर्ति मिश्रा सरकार से भी लोहा लेते रहे हैं। वह कई बार सरकारी फैसलों के खिलाफ न्यायालय भी गए हैं।

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गौरतलब है कि वरदमूर्ति मिश्रा से पहले भी कई अधिकारी वीआरएस ले चुके हैं। मिश्रा नौकरी छोड़ने की वजह निजी बता रहे हैं। चर्चा है कि वे राजनीति पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं।