मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हरेली त्योहार पर पाटन के करसा गांव से करेंगे गो-मूत्र खरीदी की शुरुआत, जीवामृत कीट नियंत्रक उत्पाद बनेंगे

Chief Minister Bhupesh Baghel will start the purchase of cow urine from Karsa village of Patan on Hareli festival, Jeevamrut will become a pest control product.

रायपुर/भिलाई। (Chief Minister Bhupesh Baghel will start the purchase of cow urine from Karsa village of Patan on Hareli festival, Jeevamrut will become a pest control product.) छत्तीसगढ़ में हरेली तिहार के मौके पर गुरुवार से गो-मूत्र की खरीदी शुरू हो जाएगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दुर्ग से इसकी शुरुआत करेंगे। वे पाटन विकासखंड के करसा गांव में आयोजित हरेली तिहार कृषि सम्मेलन कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे हैं, वहीं से गो-मूत्र खरीदी की शुरुआत भी करेंगे।

(Chief Minister Bhupesh Baghel will start the purchase of cow urine from Karsa village of Patan on Hareli festival, Jeevamrut will become a pest control product.) मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दोपहर 1.35 बजे कार से रवाना होकर पुलिस ग्राउंड हेलिपैड रायपुर पहुंचेंगे। इसके बाद दोपहर 1.55 बजे दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के करसा गांव के गौठान पहुंचेंगे। यहां दोपहर 2 से 3 बजे तक कृषि सम्मेलन कार्यक्रम में भाग लेंगे। यहीं मुख्यमंत्री गो-मूत्र की खरीदी कर पूरे राज्य में इसकी शुरुआत करेंगे। सरकार ने इसके लिए कम से कम चार रुपए प्रति लीटर की दर तय की है।

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 3.30 बजे दुर्ग के मालवीय नगर चौक पहुंचेंगे। यहां उनके द्वारा स्व. दाउ वासुदेव चंद्राकर की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। इसके बाद शाम 4.30 बजे मुख्यमंत्री निवास के लिए प्रस्थान करेंगे।

इस वजह से गो-मूत्र खरीदी की ओर बढ़ी सरकार

अधिकारियों का कहना है, गो-मूत्र की खरीदी राज्य में जैविक खेती के प्रयासों को और आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे पशुपालकों को गो-मूत्र बेचकर अतिरिक्त आय होगी। वहीं महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से जीवामृत, कीट नियंत्रक उत्पाद आदि तैयार किए जाने से रोजगार का जरिया मिलेगा।

इन जैविक उत्पादों का उपयोग किसान भाई रासायनिक कीटनाशक के बदले कर सकेंगे, जिससे कृषि में लागत कम होगी।बता दें कि सरकार की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना की शुरुआत भी हरेली के दिन हुई थी। 20 जुलाई 2020 से शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक 150 करोड़ रुपए से अधिक की गोबर खरीदी की जा चुकी है।

गोबर से गौठानों में अब तक 20 लाख क्विंटल से अधिक वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट, सुपर प्लस कम्पोस्ट बनाया जा चुका है। वर्मी खाद का निर्माण एवं विक्रय से महिला स्व-सहायता समूहों और गौठान समितियों को 143 करोड़ से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।

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