बेमियादी हड़ताल का फैसला वापस लेने से प्रदेश के दफ्तरों और स्कूलों में लौटी रौनक

रायपुर। अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के साथ ही शिक्षक संगठनों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला वापस ले लिया। जिसके बाद शिक्षक स्कूलों में हाजिरी देने के लिए पहुंच गए वहीं फेडरेशन की हड़ताल खत्म होने के बाद आज 9 दिन बाद दफ्तरों में चहल-पहल देखने को मिली।

कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने जुलाई में 5 दिन की कलम बंद हड़ताल की। इस दौरान विधानसभा में भी मामला उठा था, जिसमें सरकार की ओर से जवाब आया कि संसाधन की व्यवस्था होते ही मांग पूरी की जाएगी। फेडरेशन की दो प्रमुख मांगें थीं जिनमें महंगाई भत्ता को केंद्र सरकार के अनुरूप देने और एचआर अलाउंस बढ़ाना। दूसरी तरफ शिक्षक संगठन भी इस आंदोलन में शामिल हुए। उनकी मांग थी कि नियुक्ति के बाद की 20 वर्ष की सेवा को पूरा मानते हुए उन्हें संपूर्ण पेंशन दें और इसी के आधार पर प्रमोशन दिया जाए। साथ ही सहायक शिक्षकों को व्याख्याता और शिक्षक के बराबर वेतन दिया जाए।

हड़ताल के आखिर में प्रशासन और शिक्षक संघ में इस बात को लेकर मतभेद हो गया था कि हड़ताल आगे जारी रखी जाए या नहीं। तीन शिक्षक संगठन, छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन, शालेय शिक्षक संघ और नवीन शिक्षक संघ ने शुक्रवार को घोषणा कर दी थी कि वे काम पर नहीं लौटेंगे और बेमियादी हड़ताल पर जाएंगे क्योंकि उनकी मांग पर सरकार ने विचार नहीं किया है और न ही संगठनों को चर्चा के लिए बुलाया है। हालांकि रविवार को यह निर्णय ले लिया गया कि फेडरेशन के साथ ही हड़ताल शुरू की गई थी, इसलिए शिक्षक भी फेडरेशन के साथ रहेंगे।

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