बाबरी मस्जिद मामले से खुद को अलग करने वाले उदय उमेश ललित होंगे अगले CJI, 3 महीने से भी कम कार्यकाल, कई ऐतिहासिक फैसले..

नई दिल्ली। उदय उमेश ललित (U U Lalit) देश के अगले चीफ जस्टिस होंगे। मौजूदा मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना 27 अगस्त को रिटायर हो रहे हैं। जस्टिस ललित देश के 49वें चीफ जस्टिस होंगे और उनका कार्यकाल तीन महीने से भी छोटा होगा।

जस्टिस ललित 13 अगस्त 2014 को सर्वोच्च अदालत में जज बने थे। उन्होंने तीन तलाक समेत कई ऐतिहासिक फैसले सुनाए हैं। मौजूदा चीफ जस्टिस एनवी रमना ने जस्टिस ललित का नाम चीफ जस्टिस के लिए अनुशंसा कर दी है। गौरतलब है कि कानून मंत्रालय ने बुधवार को चीफ जस्टिस से अपने उत्तराधिकारी का नाम मांगा था।

काफी छोटा होगा कार्यकाल

जस्टिस ललित का कार्यकाल 3 महीने से भी कम का होगा। इसी साल नवंबर में रिटायर हो जाएंगे। वरिष्ठ वकील रहे ललित 9 नवंबर 1957 को पैदा हुए ललित ने 1983 में बॉम्बे हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की थी। उन्होंने 1985 तक यहां वकालत की। इसके बाद 1986 में वे दिल्ली आ गए थे। 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें वरिष्ठ वकील का दर्जा दिया था। 2जी स्पेक्ट्रम केस में ललित सीबीआई की तरफ से विशेष अभियोजक बने थे। जस्टिस ललित 8 नवंबर 2022 को अपने पद से रिटायर हो जाएंगे।

बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

जस्टिस ललित को सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया था। वह बार से देश के चीफ जस्टिस बनने वाले दूसरे न्यायाधीश रहे। इससे पहले जस्टिस एम एम सिकरी 1971 में 13वें चीफ जस्टिस बने थे। वह भी बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट में जज बनाए गए थे।

ललित ने दिए हैं कई ऐतिहासिक फैसले

जस्टिस ललित ने कई ऐतिहासिक फैसले दिए हैं। उन्होंने अगस्त 2017 में तीन तलाक पर संवैधानिक बेंच के जरिए ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। जस्टिस ललित ने 3-2 के बहुमत से तीन तलाक को गैरकानूनी और असंवैधानिक बताया था।

रद्द की 3 तलाक की व्यवस्था

22 अगस्त 2017 को तलाक-ए-बिद्दत यानी एक साथ 3 तलाक बोलने की व्यवस्था को असंवैधानिक करार देने वाली 5 जजों की बेंच के वह सदस्य थे. इस मामले में जस्टिस रोहिंटन नरीमन के साथ लिखे साझा फैसले में उन्होंने कहा था कि इस्लाम में भी एक साथ 3 तलाक को गलत माना गया है। पुरुषों को हासिल एक साथ 3 तलाक बोलने का हक महिलाओं को गैर बराबरी की स्थिति में लाता है। ये महिलाओं के मौलिक अधिकार के खिलाफ है।

राजद्रोह कानून पर जारी किया नोटिस

30 अप्रैल 2021 को जस्टिस ललित की अध्यक्षता वाली बेंच ने राजद्रोह के मामले में लगने वाली आईपीसी की धारा 124A की वैधता पर केंद्र को नोटिस जारी किया। इस मामले में कोर्ट ने मणिपुर के पत्रकार किशोरचन्द्र वांगखेमचा और छत्तीसगढ़ के पत्रकार कन्हैयालाल शुक्ला की याचिका सुनने पर सहमति दी।

विजय माल्या के खिलाफ सुनाई सज़ा

हाल ही में जस्टिस ललित ने अवमानना के मामले भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को 4 महीने की सज़ा दी। कोर्ट ने माल्या पर 2 हज़ार रुपए का जुर्माना भी लगाया। यह भी कहा कि जुर्माना न चुकाने पर 2 महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

पॉक्सो एक्ट पर भी अहम फैसला

बच्चों को यौन शोषण से बचाने पर भी जस्टिस ललित ने अहम आदेश दिया। उनकी अध्यक्षता वाली बेंच ने माना कि सेक्सुअल मंशा से शरीर के सेक्सुअल हिस्से का स्पर्श पॉक्सो एक्ट का मामला है। यह नहीं कहा जा सकता कि कपड़े के ऊपर से बच्चे का स्पर्श यौन शोषण नहीं है।

आम्रपाली के मामले में खरीदारों को राहत

जस्टिस ललित उस बेंच में भी रहे जिसने 2019 में आम्रपाली के करीब 42,000 फ्लैट खरीदारों को बड़ी राहत दी थी। तब कोर्ट ने आदेश दिया था कि आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट को अब नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन यानी NBCC पूरा करेगा। कोर्ट ने निवेशकों के साथ धोखाधड़ी करने वाले आम्रपाली ग्रुप की सभी बिल्डिंग कंपनियों का RERA रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। साथ ही, निवेशकों के पैसे के गबन और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का भी आदेश दिया।

SC/ST एक्ट पर सुनाया फैसला

अनुसूचित जाति/जनजाति उत्पीड़न एक्ट के तहत तुरंत गिरफ्तारी न करने का आदेश भी जस्टिस ललित की सदस्यता वाली बेंच ने दिया था। कोर्ट ने इस एक्ट के तहत आने वाली शिकायतों पर शुरुआती जांच के बाद ही मामला दर्ज करने का भी आदेश दिया था, हालांकि बाद में केंद्र सरकार ने कानून में बदलाव कर तुरंत गिरफ्तारी के प्रावधान को दोबारा बहाल कर दिया था।

अयोध्या केस से खुद को किया था अलग

10 जनवरी 2019 को जस्टिस यू यू ललित (UU Lalit) ने खुद को अयोध्या मामले की सुनवाई कर रही 5 जजों की बेंच से खुद को अलग किया था। उन्होंने इस बात को आधार बनाया था कि करीब 2 दशक पहले वह अयोध्या विवाद से जुड़े एक आपराधिक मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के लिए वकील के रूप में पेश हो चुके हैं।

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