गरियाबंद। बीते 5 सितम्बर को इस जिले में 65 शिक्षकों की तबादला सूची प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से जारी की गई थी, मगर शिकवा-शिकायतों के बाद समझ आया कि सूची में एक तिहाई शिक्षकों के नाम ऐसे हैं जिनका तबादला जिला स्तर पर नहीं किया जा सकता, जिसके बाद ऐसे शिक्षकों का तबादला निरस्त करना पड़ा।

DEO को जारी किया गया शो कॉज नोटिस

गरियाबंद जिले में कलेक्टर के हस्ताक्षर से जारी इस सूची में 65 शिक्षक (एलबी) और सहायक शिक्षक (एलबी) के नाम शामिल थे। स्वैच्छिक और प्रशासनिक आधार पर किये गए इन तबादलों के बाद कलेक्टर से लेकर प्रभारी मंत्री और शिक्षा मंत्री से शिकायतों का दौर शुरू हो गया। गरियाबंद कलेक्ट्रेट में तो लोगों की भीड़ लग गई। किसी को तबादले पर आपत्ति थी तो किसी ने तकनिकी आधार कुछ शिक्षकों के तबादले को गलत बताया। मुख्यालय में जब शिकायतों के आधार पर सूची की जांच की गई तब पता चला कि सहायक शिक्षक (एलबी) स्तर तक के तबादले ही जिला स्तर पर किये जा सकेंगे, जबकि शिक्षक (एलबी) स्तर के तबादले राज्य स्तर पर होंगे। इस गड़बड़ी का खुलासा होने पर गरियाबंद DEO करमन खटकर को शोकॉज जारी किया गया है। ।

प्रभात मालिक, कलेक्टर गरियाबंद

20 का नाम सूची से हुआ बाहर

कलेक्टर गरियाबंद प्रभात मालिक ने आज ही एक आदेश जारी करके 65 शिक्षकों की सूची में शुरू के 20 शिक्षकों का तबादला निरस्त कर दिया है। ये सभी शिक्षक (एलबी) स्तर के हैं जिनका तबादला जिला स्तर पर करना गलत था। बताया जा रहा है कि प्रभारी मंत्री अमरजीत भगत को धोखे में रखकर उनसे अनुमोदन कराया गया।

शेष सूची में भी घालमेल की आशंका

गरियाबंद जिले में शिक्षकों की तबादला सूची में शेष बचे जो 35 नाम है, उनमे भी कई नाम तबादला नीति के मापदंडों को पूरा नहीं करते। दरअसल मैनपुर और गरियाबन्द के बीहड़ इलाके में पदस्थ दो दर्जन से ज्यादा ऐसे नाम हैं, जिन्होंने स्वैछिक तबादला करवाया है, लेकिन इनमें से ज्यादातर लोग नीति में तय मापदंड का पालन नहीं करते। नियम के मुताबिक एकल शिक्षकीय होने या छात्र अनुपात में शिक्षक संख्या नहीं होने की स्थिति में ही तबादले की पात्रता होगी।

उधर फिंगेश्वर में तो पहले से ही अतिशेष में अतिरिक्त शिक्षक पदस्थ हैं, वहां भी तबादला पाने में शिक्षक सफल हो गए हैं, जबकि इसमें पोस्ट होने वाले शाला में शिक्षकों की कमी को भी ध्यान में रखा जाना था। देवभोग के सीनपाली में मिडिल स्कूल शिक्षक की कमी से जूझ रहा था, लेकिन वहां के शिक्षक को प्रशासनिक आदेश तहत अन्यत्र भेज दिया गया। मैनपुर गोढियारी से शिक्षक को धवइभर्री भेजने का भी जमकर विरोध हो रहा है।

इस तरह गरियाबंद जिले के शिक्षकों की तबादला सूची शुरुआत से ही विवादों में है। अब देखना है कि इस मामले में गाज किसी के ऊपर गिरती है या इसे फाइलों में ही दबा दिया जाता है। फ़िलहाल शिक्षकों की उस सूची पर नजर डालिये जिनके तबादले निरस्त कर दिए गए हैं :

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