नई दिल्‍ली/मास्‍को। यूक्रेन और रूस के बीच जंग अभी चल ही रही है कि इस बीच अरमेनिया और अजरबैजान के सनिकों के सीमा पर हुई झड़प में दोनों तरफ के मिलाकर करीब 100 सैनिक मारे गए हैं।

बता दें कि दोनों देशों के बीच कई दशकों से नागोरनो-कराबाख पर टकराव रहा है। इस इलाके पर अजरबैजान भी अपना दावा करता है, लेकिन 1994 में हुए अलगाववादी युद्ध के बाद से ही यह अरमेनिया के कब्जे में है।

अरमेनिया का कहना है कि इस खूनी झड़प में उसके 49 सैनिकों की मौत हुई है, जबकि अजरबैजान ने भी 50 सैनिकों के मारे जाने की बात कबूल की है। यह संघर्ष तब छिड़ा, जब अजरबैजान की सेना ने अरमेनियाई इलाके को निशाना बनाते हुए ड्रोन अटैक किए और फायरिंग शुरू कर दी।

पुतिन और अमेरिकी विदेश मंत्री ने भी दिया दखल

अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी शांति की अपील की है। इस बीच अरमेनिया के पीएम निकोल पाशिनयान ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की है। इसके अलावा उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से भी बात की है।

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2020 में भी हुआ था भीषण युद्ध, 6 हजार की हुई थी मौत

दोनों देशों के बीच 2020 में भी भीषण युद्ध हुआ था, जो 6 सप्ताह तक चला था। इस युद्ध में करीबी 6 लोगों की मौत हुई थी और रूस के दखल के बाद ही विवाद समाप्त हुआ था। मॉस्को की ओर से इलाके में शांति व्यवस्था की बहाली के लिए 2,000 सैनिकों को पीसकीपिंग मिशन के तहत तैनात किया गया था।

इस बीच अमेरिका और रूस दोनों ने ही अजरबैजान और अरमेनिया से शांति बहाली की अपील की है। दरअसल रूस के अरमेनिया के साथ गहरे सैन्य ताल्लुक हैं। रूस का अरमेनिया में मिलिट्री बेस भी है। इसके अलावा तेल के मामले में समृद्ध अजरबैजान से भी रूस के अच्छे रिश्ते हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच रूस अच्छे रिश्तों का पक्षधर रहा है।