विशेष संवादाता, रायपुर

रायपुर महापौर और निगम के अधिकारियों की मिली भगत से किए जा रहे भारी भ्रष्टाचार के मामले पर रायपुर नगर निगम भाजपा पार्षद दल की नेता मीनल चौबे, वरिष्ठ पार्षद सूर्यकांत राठौर, मृत्युंजय दुबे ने गंभीर आरोप लगाया है। वार्ता को संबोधित करते हुए बीजेपी पार्षदों ने कहा कि भ्रष्टाचार को कांग्रेस ने नया स्वरुप देने का प्रयास किया है। मामला तेलीबांधा थाना से वीआईपी रोड मोड़ की डिवाइडर का कथित ठेका कार्य है। जोन क्रमांक 10 के अंतर्गत तेलीबांधा थाना चौक से वीआईपी रोड टर्निंग तक डिवाइडर सौंदर्यीकरण को आमंत्रित निविदा के संबंध में यह प्रेस वार्ता आयोजित की गई है।

निगम की उपरोक्त कार्य प्रणाली के संज्ञान में आने के बाद कहां जाता है कि उपरोक्त कार्य क्रेडाई के द्वारा करवाया जा रहा है। क्या क्रेडाई शहर में कहीं भी कभी भी अपने मन से काम कर देगी । जब क्रेडाई वहां काम कर रही है तो नगर निगम अनटाइड फंड से लगभग दो करोड़ की स्वीकृत राशि का भुगतान किसको किया जाना था दस्तावेज हैं और इन सारे दस्तावेज के साथ पार्षद दल संगठन के नेतृत्व में उपरोक्त कार्य शैली की शिकायत EOW को दर्ज करा रहे हैं| वार्ता में भाजपा रायपुर जिलाध्यक्ष जयंती पटेल, उप नेता प्रतिपक्ष मनोज वर्मा ,वरिष्ठ पार्षद मृत्युंजय दुबे प्रमोद साहू माजूद रहे।

बीजेपी पार्षद का सवाल

  1. दिनांक26 अक्टूबर को जोन क्रमांक 10 से जनसंपर्क अधिकारी नगर पालिक निगम के नाम एक ज्ञापन में एक प्रति महापौर एजाज़ ढेबर को भी भेजी जाती है। संलग्न निविदा में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि उपरोक्त कार्यो में मैनुअल पद्धति से निविदा आमंत्रित की जाती है। उपरोक्त लगभग दो करोड़ के कार्य को 12 भागों में ऐसा बांटा गया जिसमें ऑनलाइन टेंडर की गुंजाइश न रहे। 30 अक्टूबर को निविदा आमंत्रण का प्रकाशन होता है उसके बाद फाइल मुख्यालय में तकनीकी स्वीकृति के पश्चात वित्तीय स्वीकृति के लिए जाती है। जिसमें अनटाइड फंड से महापौर व आयुक्त मयंक चतुर्वेदी के दस्तखत से आगे की कार्यवाही के लिए फाइल भेजी गई।
  2. जबकि राज्य शासन के स्पष्ट निर्देश है कि एक ही प्रकार के कार्य के लिए अलग-अलग टेंडर करना निषेध है। फिर भी समान प्रवृत्ति के कार्य का 12 अलग-अलग टेंडर क्यों किया गया? महापौर और आयुक्त के हस्ताक्षर वाली वित्तीय स्वीकृति यह साबित करती है कि दोनों ने राज्य शासन के आदेश की अवहेलना की। और इसके पीछे मंशा यही थी कि उपरोक्त कार्य का टेंडर मैनुअल हो ऑनलाइन ना हो।
  3. दूसरी प्रमुख बात यह है कि नगरीय प्रशासन का स्पष्ट निर्देश है कि प्रशासकीय अनुमोदन हेतु आवश्यक सर्वेक्षण, अनुसंधान, परीक्षण, अध्ययन,आदि पूर्ण रूप से संपन्न कर एवं आवश्यक डिजाइन, ड्राइंग,तैयार कर प्रतिवेदन होना चाहिए | जिस दिन समाचार पत्र में 30 अक्टूबर को निविदा आमंत्रण का प्रकाशन होता है उस दिन कार्य स्थल पर निर्माण कार्य आधा से ज्यादा हो चुका था। क्या अधिकारियों ने यही सर्वेक्षण किया। अधिकारियों की जानकारी में ठेकेदार वहां काम कर रहा था और ठेकेदार को वर्क आर्डर देने की पूरी तैयारी थी। जिसके इशारे पर इस प्रकार का कृत्य किया गया महापौर और आयुक्त अगर इसमें संलिप्त नहीं है तो ऐसे दोषी अधिकारियों पर क्या कार्यवाही करेंगे?
  4. साथियों जिस स्थल पर उपर्युक्तकार्य होना था वहां NHAI कि संपत्ति है। बिनाNHAI की सहमति पत्र के जोन से टेंडर निकालना असंवैधानिक है। बिना NHAIकी सहमति पत्र के आयुक्त और महापौर के वित्तीय स्वीकृति के दस्तखत के उपरांत जोन से टेंडर प्रक्रिया करना असंवैधानिक है। और तो और साथियों आश्चर्य की बात है कि फाइल की नस्ती में जो कालम है भूमि स्वामित्व व हस्तांतरण उसमें रिमार्क लिखा जाता है की आवश्यकता नहीं है । इस प्रकार नियम कानून की धज्जियां उड़ाना कांग्रेस द्वारा ही संभव है पूरी तरह से महापौर इसमें शामिल है ।
  5. अगर नगरनिगम की कार्यप्रणाली ठीक नहीं है तो प्रशासनिकजिम्मेदारी आयुक्त मयंक चतुर्वेदी की बनती है। बीजेपी ने आयुक्त की बात दोहराई कहा जो करना है कर लो , जहां जाना है चले जाओ, ऐसा कह कर हमे डराया नही जा सकता। नगर निगम की गैर जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली का दूसरा उदाहरण रावतपुरा फेस टू के नाली निर्माण का काम है। 17 मई को उपरोक्त स्थल पर नाली एवं रोड निर्माण का कार्य जो कि लगभग एक करोड़ का था उसे भी टुकड़ों टुकड़ों में तोड़ा गया और 5 अलग-अलग पार्ट में टेंडर निकाला गया और एक ही व्यक्ति को काम दिया गया।