विशेष संवादाता, रायपुर

सीएम भूपेश बघेल समेत तीन मंत्रियों ने राजभवन की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्यपाल अनुसुइया उईके इन सबसे अलग सरकार से यही कहती रहीं है कि वह आंखें बंद कर संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी। ऐसे में 15 दिनों से 76 प्रतिशत आरक्षण संबंधी संशोधन विधेयक को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाज़ियों के बीच मामला सुप्रीम कोर्ट के पाले में चला गया है। कल शुक्रवार को इस पर पहली सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण विवाद को लेकर एक याचिका पर अर्जेंट हियरिंग मंजूर की है। सामाजिक कार्यकर्ता बीके मनीष ने यह याचिका दायर की थी।

राज्यपाल मुख्य सचिव, सचिव जीएडी और एक अन्य सचिव के डी कुंजाम, से भी प्रावधानों के असर को समझने का प्रयास करते रहीं। उइके एक ही बात पर जोर देते रहीं कि उनकी मंजूरी के बाद नये आरक्षण को किसी भी कोर्ट में चुनौती नहीं दिया जा सके। उन्होंने बुधवार को सरकार को पत्र लिखकर 10 प्रश्नों का जवाब भी मांगा है। लेकिन राज्यपाल सुश्री उइके को उनके प्रश्नों का जवाब नहीं मिल पाया है। ऐसे में आरक्षण विधेयक प् सूबे की सियासत गरमा गई है और सुप्रीम कोर्ट में अर्जेन्ट हियरिंग मंजूरी से जल्द ही सब कुछ स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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