गया। तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने चीन की सरकार पर बौद्ध धर्म को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि चीन की कम्युनिस्ट सरकार धर्म को जहर की तरह देखती है। एक सभा को संबोधित करते हुए दलाई लामा ने कहा कि तिब्बती और मंगोलियाई नागरिक धर्म के प्रति समर्पित हैं। लेकिन चीन सरकार बौद्ध धर्म को जहर की तरह देखती है और उसे पूरी तरह से नष्ट करने की कोशिश कर रही है। लेकिन वो सफल नहीं हो पा रहे हैं।

दलाई लामा ने ये बता दें कि बिहार का बोध गया बौद्ध धर्म को मानने वालों के लिए एक पवित्र स्थल है। बोध गया ही वो जगह है जहां राजकुमार सिद्धार्थ को ज्ञान की प्राप्ति हुई और वो गौतम बुद्ध कहलाए। तब से ही बोध गया बौद्ध का पवित्र स्थल है। दलाई लामा बोध गया को वज्र स्थान मानते हैं। दलाई लामा चीन को लेकर काफी मुखर रहते हैं। तवांग झड़प के बाद भी दलाई लामा ने कहा कि भारत और चीन दो सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं। हाल के दशकों में कई उतार-चढ़ाव आए हैं।

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जिनपिंग के निशाने पर बौद्ध धर्म
बौद्ध धर्म के जानकारों के मुताबिक, चीन जानता है कि बिना तिब्बती बौद्ध धर्म को खत्म किए वो कभी भी तिब्बत देश पर पूरी तरह कब्जा नहीं कर सकता। अरुणाचल प्रदेश के तवांग की मॉनेस्ट्री इसलिए उसके लिए सबसे अहम है।  चीन का मकसद तवांग में भौगोलिक के साथ ही अध्यात्मिक रूप से कब्जे का है। माना जा रहा है कि तवांग में ही 15वें दलाई लामा अवतार लेने वाले हैं।