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रायपुर। हसदेव अरण्य में फर्जी ग्राम सभा के आधार पर जारी वन स्वीकृति और और पांचवी अनुसूची क्षेत्र में ग्राम सभा की अनदेखी कर हुई भूमि अधिग्रहण खिलाफ लगभग पिछले एक वर्ष से चल रहे धरने को समर्थन देने के लिए किसान नेता राकेश टिकैत 13 फरवरी को ग्राम हरिहरपुर में पहुंच रहे हैं। इस अवसर पर विशाल किसान महा-सम्मेलन का आयोजन हो रहा है|

हसदेव अरण्य को कोल ब्लॉक से खतरा

हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के उमेश्वर सिंह आर्मो ने इस संबंध में प्रेस नोट जारी करते हुए बताया कि उत्तर छत्तीसगढ़ का घना वन क्षेत्र हसदेव अरण्य, छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद के नाम पर बने मिनीमाता बांगो बांध का कैचमेंट क्षेत्र है| इस बांध से जांजगीर, कोरबा, बिलासपुर जिलों की लाखों हेक्टेयर जमीन सिंचित होती है| जैव विविधता से परिपूर्ण यह विशाल वन क्षेत्र हाथियों का रहवास और उनके आने जाने का रास्ता है| यहां निवासरत आदिवासियों की आजीविका, संस्कृति और उनके जीवन का प्रमुख आधार भी यही जंगल और जमीन है| विभिन्न अध्ययनों के अनुसार हसदेव अरण्य के निवासियों की वार्षिक आमदनी का 60 प्रतिशत हिस्सा जंगल से आता है|

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हसदेव पर किए गए अध्ययन में केंद्र सरकार के संस्थान “भारतीय वन्य जीव संस्थान” ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि “यदि हसदेव में किसी भी खनन परियोजना को अनुमति दी गई तो बांगो बांध खतरे में पढ़ जायेगा, उसकी जल भराव की क्षमता कम हो जाएगी| खनन होने से छत्तीसगढ़ में मानव–हाथी का संघर्ष इतना ज्यादा बढ़ जायेगा कि फिर उसे कभी नियंत्रित नही किया जा सकेगा।”

जानकर बताते हैं कि यदि हसदेव का जंगल कट गया तो न सिर्फ जीवनदायनी हसदेव नदी सूख जाएगी बल्कि हमारी प्राणवायु आक्सीजन का प्रमुख स्रोत ख़त्म हो जायेगा| पिछले 5 वर्षो में 70 से ज्यादा हाथी और सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो चुकी है| किसानों की हजारों हेक्टेयर फसल प्रतिवर्ष हाथियों द्वारा रौंदी जा रही है|

बरसों से चल रहा है संघर्ष

बता दें कि हसदेव को बचाने के लिए पिछले 10 वर्षो से हसदेव के आदिवासी-किसान आन्दोलन कर रहे हैं| अक्टूबर 2021 में हसदेव के ग्रामीणों ने 300 किलोमीटर पदयात्रा कर मुख्यमंत्री और राज्यपाल से मुलाकात की थी| कोई कार्यवाही नहीं होने पर पिछले साल 2 मार्च 2022 से ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं| किसान नेता राकेश टिकैत 13 फरवरी को ग्राम हरिहरपुर में पहुंच रहे हैं। इस सम्मेलन में प्रदेश के अलावा झारखंड और ओडिशा के भी कई संगठन शामिल होने वाले हैं।

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छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला ने बताया, राकेश टिकैत सोमवार सुबह 8 बजे दिल्ली से रायपुर पहुंचेंगे। उनके साथ किसान आंदोलन के कुछ और नेता भी यहां पहुंचने वाले हैं। यहां से वे सरगुजा के सड़क मार्ग से रवाना होंगे।

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