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रायपुर। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के आंदोलन के बीच स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षा के अधिकार (RTE) का काम एक बार फिर संचालक लोक शिक्षण (DPI) को सौंप दिया है। पूर्व में इसे संचालक, समग्र शिक्षा को दिया गया था, मगर समग्र शिक्षा ने हाथ खड़े कर दिए, जिससे विवाद की स्थिति निर्मित हो गई थी।

इस तरह चल रही है “गांधीगिरी”

दरअसल प्रदेश भर के 900 निजी स्कूल संचालकों ने RTE के प्रतिपूर्ति राशि की मांग को लेकर मंगलवार को प्रदेश भर के अधिकारियों को गुलाब फूल भेंट किया और आज काली पट्टी लगाकर विरोध जताया। इस “गांधीगिरी” का यह असर हुआ कि RTE का काम अब फिर से DPI को सौंप दिया। हालांकि इस संबंध में आदेश 3 फरवरी को जारी किये जाने का उल्लेख है, मगर अधिकारियों ने इसकी जानकारी आज सार्वजनिक की है। इसके बाद निजी स्कूल संचालकों ने थोड़ी राहत तो महसूस की है, मगर अपने आंदोलन को फ़िलहाल संचालक, DPI सुनील जैन से चर्चा के बिना ख़त्म नहीं करने का फैसला किया गया है।

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दो वर्षों से नहीं मिली RTE की राशि..!

दरअसल निजी स्कूलों में भर्ती किये जाने वाले जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई के एवज में केंद्र सरकार के ओर से प्रतिपूर्ति राशि दी जाती है और इसमें राज्य सरकार का भी अंशदान होता है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने TRP न्यूज़ को बताया कि शिक्षण सत्र 2020- 21 और 2021- 22 की प्रदेश भर के 900 निजी स्कूलों को RTE की प्रतिपूर्ति राशि नहीं मिली है। जिसकी मांग को लेकर इनके संगठन ने सांकेतिक प्रदर्शन शुरू किया है।

DPI और समग्र शिक्षा के बीच टशन

बता दें कि शिक्षा के अधिकार कानून के क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार ने समग्र शिक्षा विभाग को नोडल एजेंसी बनाया है, मगर छत्तीसगढ़ में यह काम संचालक, लोक शिक्षण (DPI) के माध्यम से होता रहा है। हालांकि केंद्र सरकार RTE से संबंधित फंड समग्र शिक्षा को ही ट्रांसफर होता है, जिसके बाद डिमांड पर यह रकम DPI को ट्रांसफर की जाती है। इस मुद्दे को लेकर DPI और समग्र शिक्षा के बीच काफी समय से विवाद की स्थिति बनी हुई है। DPI का कहना है कि जब केंद्र ने समग्र शिक्षा विभाग को नोडल एजेंसी बनाया है तो यह काम समग्र शिक्षा ही देखे, मगर RTE की मूल एजेंसी यह काम देखने को तैयार नहीं है।

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दो महीने में आदेश लेना पड़ा वापस

दो विभागों के बीच विवाद के निपटारे के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने 12 दिसंबर 2022 को आदेश जारी करते हुए RTE के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी नरेंद्र दुग्गा, प्रबंध संचालक, समग्र शिक्षा, राज्य परियोजना कार्यालय को सौंप दी, मगर बताते हैं कि समग्र शिक्षा ने RTE का कोई भी काम नहीं किया, जिससे निजी स्कूल संचालक परेशान हो गए। इसी के चलते निजी स्कूल संचालको के संगठन ने आंदोलन शुरू किया और इसके तहत सांकेतिक प्रदर्शन किया। प्रदेश भर में हो रहे इस आंदोलन को देखते हुए RTE का काम दोबारा DPI को सौंप दिया गया है।

शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा असर

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि अगर दो-दो साल से स्कूलों को RTE की प्रतिपूर्ति राशि नहीं दी गई है तो स्वाभाविक है कि इसका असर स्कूलों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। इसका असर कही न कहीं बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा। बहरहाल नए आदेश से स्कूल संचालक ये मानते हैं कि अब RTE के कामकाज में तेजी आएगी मगर अपने आंदोलन को उन्होंने फ़िलहाल स्थगित नहीं किया है। कल उनकी मुलाकात DPI सुनील कुमार जैन से होगी, जिसके बाद ही वे कोई फैसला करेंगे।

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12 दिसंबर 2022 को जारी आदेश :

अब वापस लिया गया पुराना आदेश :

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