Rahul's Choice Shivkumar - कर्नाटक की पसंद डीके और MLA की पावर सिद्धारमैया के पास
Rahul's Choice Shivkumar - कर्नाटक की पसंद डीके और MLA की पावर सिद्धारमैया के पास

टीआरपी डेस्क

नई दिल्ली। कर्णाटक की सरकार डीके शिवकुमार कहलायेंगे या फिर सिद्धारमैया इस पर आज रात तक फैसला लिया जा सकता है। उम्मीद की जा रही है कि राहुल का बस चले तो वो डीके शिवकुमार के नाम का एलान कर दें। लेकिन आगामी लोकसभा के मद्देनज़र कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे फूंक फूंक कर कदम रख रहे हैं। क्योंकि डीके शिवकुमार सभी की पहली पसंद बन गए हैं।

अभी कर्नाटक में लोकसभा की 28 में से सिर्फ एक सीट पर कांग्रेस का सांसद है, जो डीके शिवकुमार के भाई डीके सुरेश हैं। उन्होंने बेंगलुरु रूरल सीट से चुनाव जीता था।इधर सिद्धारमैया के पास अनुभव और MLA की ताकत भी है। इसलिए खरगे कोई भी फैसला लेने से पहले पार्टी, चेहरा, पसंद के अलावा 61% आबादी वाली 4 कम्युनिटी को भी साधने का रास्ता चुन सकते हैं।

अगर ऐसा हुआ तो फिर शिवकुमार की जगह सिद्धारमैया के अलावा भी उपमुख्यमंत्री का कांसेप्ट लाया जा सकता है। ढाई-ढाई साल वाला कॉन्सेप्ट भी अच्छा था अगर ईमानदारी से इसे पार्टी लागु करती तब। लेकिन मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इसका दुष्प्रभाव सब के सामने है। इसलिए उपमुख्यमंत्री की संख्या बढ़ सकती है। खैर जो भी होगा उसपर आज ही दिल्ली में फैसला रात तक लिया जायेगा।

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डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के अलावा दोनों के समर्थक विधायकों को भी बुलावा है। इन विधायकों में डिप्टी CM:की संभावना भी तलाशी जाएगी और 61% आबादी वाली 4 कम्युनिटी को लोकसभा चुनाव से पहले साधने की कोशिश भी होगी। खरगे किसी भी टूट और बगावत को रोकने का गणित लगा चुके हैं।

यह भी हो सकता है फैसला

पब्लिक ओपिनियन डीके शिवकुमार के पक्ष में है, ज्यादातर विधायकों का सपोर्ट सिद्धारमैया के साथ है। ऐसे में कांग्रेस हाईकमान इस विकल्प के बारे में भी विचार कर चुके हैं कि डीके शिवकुमार को 2024 के लोकसभा चुनाव तक प्रदेश अध्यक्ष बनाकर रखा जाए। ताकि जिस तरह उन्होंने विधानसभा चुनाव को मैनेज किया है, उसी तरह लोकसभा चुनाव में भी पार्टी बड़ी जीत हासिल कर सके। हालांकि, उन्हें डिप्टी CM बनाए जाने की संभावना ज्यादा है।

यह 4 समाज साधने में है कांग्रेस

कर्नाटक में कुरुबा आबादी 7%, लिंगायत 16%, वोक्कालिगा 11%,अनुसूचित जाति जनजाति करीब 27% हैं, यानी कांग्रेस इस फैसले से 61% आबादी को साधना चाहती है।

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