कोरबा। ऊर्जा नगरी के नाम से मशहूर कोरबा जिला वैसे तो धन-धान्य से भरपूर है और यहां हर वर्ष विकास के नाम पर DMF से अरबों रूपये खर्च किये जाते हैं, मगर यहां के अनेक इलाके आज भी पिछड़े हुए हैं। शहरी इलाके में तो बड़े-बड़े निर्माण कार्य भी नजर आते हैं, लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यहां बिजली का उत्पादन होने के बावजूद दर्जनों ऐसे गांव हैं जहां आज तक बिजली नहीं पहुंच सकी है। ऐसे ही कुछ गांव कोरबा जिले के रामपुर विधानसभा क्षेत्र में हैं जहां राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवा आदिवासियों के परिवार निवास करते हैं। विकास से कोसों दूर इन कोरवाओं ने आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है।

आखिर क्या समस्या नहीं है इस गांव में..!

कोरबा जिले के रामपुर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-21के ग्राम पंचायत केराकछार के आश्रित ग्राम सरडीह, बगधरी डांढ़ के लोगों ने गांव में जगह-जगह बैनर-पोस्टर लगा रखा है। जिसमे चुनाव का बहिष्कार करने की बात लिखी गई है। यहां लगभग आधे दर्जन गांव ऐसे हैं, जहां पहाड़ी कोरवा जनजाति परिवार निवास करते हैं। वे खेती किसानी के अलावा वनोपज संग्रहण कर जीविकोपार्जन करते हैं। इन गांवों में रहने वाले परिवारों को अभी भी पानी बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की दरकार है। गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं है, जिसके चलते आपात स्थिति में मदद के लिए ग्रामीण मुख्यालय में सूचना भी नहीं दे पते। गांव में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है।

पीते हैं ढोंढ़ी का पानी, बिजली से भी वंचित

यहां रहने वाले पहाड़ी कोरवा व कुछ अन्य जनजाति के परिवार ढोढ़ी के पानी का उपयोग करते हैं। उन्हें ऊर्जाधानी का रहवासी तो कहा जाता है, लेकिन उन्हें बिजली भी नसीब नही है। उनके लिए सबसे बड़ी समस्या सड़क की है। वे सर्दी, गर्मी और बारिश के दिनों में भी पगडंडियों से होकर मुख्य मार्ग तक पहुंचते हैं। बगधरी डांड में रहने वाले बंधन सिंह पहाड़ी कोरवा का कहना है कि उनके गांव में पानी व बिजली की कमी है। उन्हें अंधेरे में रात गुजारनी पड़ती है, जिससे वन्य प्राणियों के अलावा जहरीले जीव जंतुओं का खतरा बना रहता है।

See also  नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव : 22 से नामांकन जमा कर सकेंगे प्रत्याशी, बीरगांव नगर निगम को छोड़कर पूरे जिले में आदर्श आचार संहिता हुई लागू

गांव का कितना विकास हुआ, इन बच्चों को देखकर समझिये

मोबाइल पर बात करने के लिए अपनाते हैं ऐसा तरीका

इस गांव की कुमुदिनी मिंज ने तो मोबाइल कनेक्टिविटी को लेकर होने वाली समस्या भी गिनाई। उसका कहना है कि गांव तक बेहतर सड़क की कमी तो है ही, मोबाइल कनेक्टिविटी भी नहीं है। कई बार गर्भवती महिला, मरीज अथवा कोई अन्य घटना घटित होने पर घायल को अस्पताल ले जाने के लिए टोल फ्री नंबरों में संपर्क करना होता है, तब उन्हें पहाड़ी के ऊपर या फिर पेड़ पर चढ़ना पड़ता है। कई बार मुख्य मार्ग में पहुंचने के बाद संपर्क होता है। अस्पताल पहुंचने में देरी होने से अनहोनी की आशंका भी बनी रहती है।

प्रशासन की गलती का खामियाजा भुगत रहे ग्रामीण

जिला प्रशासन ने वर्षों पहले ग्राम पंचायत के सीमांकन के दौरान जो गलती की थी उसका खामियाजा आज भी सरडीह और बगधरी डांड के ग्रामीण भुगत रहे हैं। दरअसल इन दोनों गांवों को पास के पंचायत मदनपुर से जोड़ने की बजाय केराकछार पंचायत से जोड़ दिया गया। अब ग्रामीणों को पंचायत संबंधी किसी भी काम के लिए पहाड़ी पार कर केराकछार पहुंचना पड़ता है। और अगर वे सड़क मार्ग से भी पंचायत जाते हैं तो उन्हें 20 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करनी पड़ती है, जबकि सरडीह और बगधरी डांड की दूरी मदनपुर पंचायत से महज 4 किलोमीटर है। यहां तक आवागमन के लिए सड़क भी है।

See also  Kirandul-Kottavalasa Rail Line: किरंदुल-कोट्टावालसा रेल लाइन में पटरी पर गिरी चटृान, मालगाड़ी डीरेल, आवागमन बंद

“चुनाव बहिष्कार के अलावा कोई विकल्प नहीं”

यहां के ग्रामीणों का कहना है कि पानी, बिजली, सड़क और मोबाइल कनेक्टिविटी जैसी सुविधा मुहैया कराने की मांग को लेकर वे सरकारी दफ्तरों और जन प्रतिनिधियों का चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं। वे अब पूरी तरह से निराश हैं। ऐसे में उनके सामने विधानसभा चुनाव का बहिष्कार के अलावा कोई भी रास्ता नहीं बचा। ग्रामीणों ने अपनी मांग पूरी नहीं होने पर चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। पहाड़ी कोरवा गावों के सरहद पर विधानसभा चुनाव बहिष्कार के बैनर पोस्टर लगाए गए हैं, ताकि कोई भी प्रत्याशी अथवा अफसर उनके गांव में न पहुंचे। यदि समस्या का निराकरण किया जाता है तो ही वे चुनाव में हिस्सा लेने की बात कह रहे हैं।

ऐसे गांवों को है DMF की जरुरत

जिला खनिज न्यास (DMF) के चलते कोरबा जिला हमेशा सुर्खियों में रहता है। यहां कोयले की खदानों से DMF के रूप में मिलने वाला फण्ड दूसरे जिलों को बांटने के बाद भी कई सौ करोड़ रूपये बच जाता है। जिले के अधिकारी और नेता जब इस रकम से खर्च के लिए प्रस्ताव देते हैं तो जिले के इन पिछड़े इलाकों का नाम लेने वाला कोई भी नहीं होता। अगर जरा सा भी ध्यान यहां के जनप्रतिनिधि देते तो ऐसे गांवों का संपूर्ण विकास हो सकता था, मगर नतीजा सामने है।

See also  BREAKING : छत्तीसगढ़ में जोनों का बंटवारा, रायपुर का ये विकासखंड अब रेड जोन में, आदेश में देखें पूरी डिटेल

बिजली के अभाव में गुजारा कर रहे हैं ग्रामीण

ग्रामीणों से मिलकर समस्या जानेंगे विधायक जी

भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री ननकी राम कंवर के इलाके में ये गांव आते हैं। इस संबंध में हमने ननकी राम कंवर से बात की तब उन्होंने कहा कि काम तो प्रशासन को करना होता है, वे कभी ध्यान दें तब ना। मगर जब हमने उनके द्वारा किये गए प्रयासों के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने कहा कि गांव की प्रमुख समस्या बिजली की है। वे उस ग्राम पंचायत में खुद जायेंगे और उनकी समस्याओं को जानने के बाद उसे दूर करने का प्रयास करेंगे।

बता दें कि ननकी राम कंवर रामपुर क्षेत्र का बरसों से प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और वे विकास के मुद्दे को लेकर मुखर भी रहे हैं, मगर यह भी सच है कि उनके क्षेत्र के अनेक इलाके ऐसे भी हैं जो आज भी पिछड़े हुए हैं। हालांकि यह भी सच है कि ऐसे पिछड़े इलाकों की जानकारी और DMF जैसे फंड जिले में होने के बाद भी जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते, यह भी इन इलाकों के पिछड़ने की प्रमुख वजह है।

FILE PHOTO : समस्याओं को लेकर इस तरह लड़ने वाले ननकी राम कंवर के कई इलाके आज भी हैं पिछड़े