रायपुर। 36 गढ़ों को मिलकर बना है छत्तीसगढ़ राज्य, और यहां के लोग स्वभावतः बड़े सीधे होते हैं। यह बात तो सच है मगर आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यहां के शासकीय विभागों में बीते एक साल से कोई भी भ्रष्ट कर्मचारी या अधिकारी यहां की जांच एजेंसियों ACB या EOW को नहीं मिला। जी हां, आंकड़ों पर नजर डालें तो ACB ने बीते एक साल में एक भी छापामार कार्रवाई नहीं की और किसी को भी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ नहीं पकड़ा। वहीं आर्थिक गड़बड़ी का केवल एक ही मामला दर्ज किया गया जो एक बैंक के अधिकारी द्वारा अपने अधीनस्थ के खिलाफ रुपयों के गबन का कराया गया है।

आये दिन रिश्वतखोरी के वीडियो होते हैं वायरल..

छत्तीसगढ़ राज्य की बात करें यहां शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा आम लोगों से काम के एवज में रिश्वत लेते हुए VIDEO खींचकर वायरल करने के वाकये अक्सर सामने आते हैं। ऐसे मामलो की जांच के बाद संबंधितों को निलंबित भी किया जाता है, मगर इस तरह का करप्शन रोके जाने का प्रयास फ़िलहाल पूरे प्रदेश में कही नहीं हो रहा है।

भारी-भरकम सेट अप..?

छत्तीसगढ़ में सरकार के अधीन दो जांच एजेंसियां कार्यरत हैं। इनमें आर्थिक अपराध के लिए EOW और भ्रष्टाचार संबंधी अपराधों के लिए ACB काम करती हैं। सरकार ने इनके काम-काज के लिए भारी-भरकम सेटअप दे रखा है। इनमें बड़ी संख्या में, सब इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर, डीएसपी के अलावा एएसपी और एसपी शामिल हैं। आंकड़े बताते हैं कि बीत रहे वर्ष 2023 में रिश्वत लेते पकड़े जाने के लिए ACB द्वारा एक भी छापामार कार्रवाई नहीं की गई। सच तो यह है कि बीते 14 महीने से इस तरह की कोई भी कार्रवाई सामने नहीं आयी है।

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केवल एक FIR, वह भी…

छत्तीसगढ़ के विभिन्न थानों में रोजाना दर्ज होने वाले FIR की जानकारी छत्तीसगढ़ पुलिस के ‘समाधान’ नमक मोबाइल एप्प पर उपलब्ध है। इसमें ACB के रायपुर के इकलौते थाने के रिकॉर्ड को खंगालें तो इसमें साल भर में केवल जुलाई के महीने में केवल एक ही FIR दर्ज है, वह भी एक बैंक अधिकारी ने दर्ज कराई है। यह मामला राजिम के इंडियन ओवरसीज बैंक का है, जिसके रायपुर में पदस्थ अधिकारी अनिल कुमार वलेचा ने राजिम बैंक की अधिकारी अनीता पाणीग्राही के ऊपर फर्जी ज्वेल लोन की आड़ में एक करोड़ पैंसठ लाख रूपये से भी अधिक की राशि गबन किये जाने की शिकायत की है। केवल इसी प्रकरण में ACB में FIR दर्ज किया गया है। मगर ACB/EWO ने अपने स्तर पर एक भी प्रकरण दर्ज नहीं किया है। है न आश्चर्य करने वाली बात।

मायूस लौटते हैं शिकायतकर्ता

प्रदेश भर में भ्रष्टाचार के जो मामले प्रकाश में आते हैं, उसके अलावा बड़ी संख्या में पीड़ित अपनी शिकायतें लिखित में या तो डाक से भेजते हैं, या फिर खुद ACB के मुख्यालय में पहुंचकर आवेदन जमा करते हैं। दरअसल ACB/EOW ने पूर्व में बाकायदा इस्तहार जारी करके शासकीय/अर्ध शासकीय इकाइयों में होने वाले भ्रष्टाचार की सूचना हेल्पलाइन नम्बर/ईमेल/डाक अथवा ACB के मुख्यालय या क्षेत्रीय कार्यालयों में करने की अपील की थी। इसी के अनुरूप लोगों द्वारा शिकायतें भी की जा रही हैं। बताया जा रहा है कि अमूमन हर रोज लगभग 10 शिकायतें ACB मुख्यालय में पहुंचती हैं। वहीं कार्यालय में पहुंचकर शिकायत जमा करने वाले अधिकांश नागरिकों को प्रकरण से संबंधित अन्य दस्तावेज खुद ही निकालकर लाने को कहकर टाल दिया जाता है। शिकायत जमा करने के दौरान अधिकारियों का जो रवैया होता है उसे देखकर पीड़ित लोग नाउम्मीद होकर वापस लौटते हैं।

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जांच के नाम पर दौड़ रही रही हैं फाईलें

भ्रष्टाचार पर लगाम कसने वाली ACB और EOW का अमला पूरे वर्ष खाली बैठा रहा और किसी के भी खिलाफ न तो छापामार कार्रवाई की गई, और न ही किसी के भी खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखे जाने का मामला दर्ज किया है। इनका कार्यालय भगत सिंह चौक के पास ‘राज्य अतिथि गृह ‘पहुना’ और राजभवन के बाजू में संचालित है। जहां जांच के नाम पर केवल फाइलें इस कार्यालय से उस कार्यालय तक दौड़ती रहती हैं।

ACB के कार्यालय में जाकर अगर आप आंकड़े या फिर अन्य कोई जानकारी अधिकारियों से लेना चाहें तो यह कहकर टाल दिया जाता है कि यहां RTI लागू नहीं है इसलिए हम कोई भी जानकारी नहीं दे सकते। जबकि सच तो यह है कि केवल जांच प्रक्रिया को छोड़कर सारी जानकारियां ACB/EOW से निकाली जा सकती हैं।

अब सवाल यह है कि पिछले साल तक ACB की सक्रियता कुछ हद तक थी, मगर फ़िलहाल यह पूरा साल बिना FIR के गुजर गया। साल भर में न तो छापे पड़े और न ही किसी के खिलाफ आर्थिक अपराध का FIR दर्ज किया गया। हालांकि अब उम्मीद की जा रही है कि नई सरकार के आने के बाद अब ACB /EOW के कामकाज में सक्रियता आएगी, अन्यथा अब भी यहां के अधिकारी मूल काम को छोड़कर दूसरे कार्यों में मशगूल नजर आएंगे।

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ED ने कर दी भरपाई

प्रदेश में बीते कई महीनों से ACB और EOW के कामकाज में शिथिलता तो रही मगर यह लोगों को नजर नहीं आयी। दरअसल केंद्र की एजेंसी ED ने पूरे साल भ्रष्टाचार के मामलों में प्रदेश भर में इतनी कार्रवाइयां की कि किसी का ध्यान राज्य की जांच एजेंसियों की ओर नहीं गया। ED ने प्रदेश के सरकारी विभागों में हुए भ्रष्टाचार के प्रकरणों में जमकर छापेमारी और गिरफ्तारियां कीं। सभी मामलों का सरकार से कनेक्शन जोड़ा गया। ED ने अपनी जांच रिपोर्ट में इसका उल्लेख भी किया और यह कार्रवाई अब भी जारी है। एक तरीके से माना जा सकता है कि जब ED और IT जैसी केंद्र की एजेंसियां राज्य में कार्रवाई कर ही रही हैं तो फिर इस तरह के कार्यों में और मेहनत करने की आखिर क्या जरुरत है।