रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र अगले महीने 5 फरवरी से शुरु होने जा रहा है, जिसकी अधिसूचना विधानसभा सचिवालय से जारी की जा चुकी है। लेकिन, बजट सत्र से पहले प्रदेश सरकार अपने खाली खजाने को भरने के लिए पुराने सिस्टम पर चलने की तैयारी में दिख रही है। आने वाले वित्तीय वर्ष 2024 में प्रदेश सरकार ने केवल शराब बिक्री से लगभग 11000 करोड़ रुपए की कमाई करने की तैयारी कर ली है।

सरकार ने बिक्री का लक्ष्य 60 प्रतिशत बढ़ाया..!

हालांकि बुधवार को सीएम विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में हुई कैबिनेट की बैठक में इस साल नई शराब दुकान नहीं खोलने का फैसला लिया गया है मगर इस वर्ष सरकार ने शराब बिक्री का लक्ष्य लगभग 60 प्रतिशत बढ़ा दिया है।

सूत्रों की मानें तो नई नीति का कुछ दिन पहले ही प्रेजेंटेशन हुआ था, जिसमें शराब बिक्री से सरकार को होने वाली कमाई कैसे बढ़े, इसकी चर्चा की गई। आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष शराब ब्रिकी का लक्ष्य 6700 करोड़ था जिसे बढ़ाकर इस साल के अंत तक 8300 करोड़ कर दिया गया है। हालांकि आबकारी विभाग इस लक्ष्य की संभावित पूर्ति 8100 करोड़ मानकर चल रहा है।

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इस तरह बढ़ाई जाएगी कमाई…

दरअसल पूर्व की डॉ रमन सिंह की सरकार ने शराब की दुकानें खुद चलाने की जो नीति बनाई थी, उसमें कांग्रेस की सरकार ने फेरबदल किया और एफएल-10 लाइसेंस का सिस्टम लागू कर दिया। बताया जा रहा है कि भाजपा की वर्तमान सरकार इस सिस्टम में फेरबदल करेगी।

क्या है एफएल-10 लाइसेंस..?

एफएल-10 लाइसेंस प्राप्त कंपनियां बाजार से शराब खरीद कर सरकार को सप्लाई करती हैं। इस खरीदी के अलावा भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन का भी काम का अधिकार इस लाइसेंस के तहत कंपनी को मिलता है।

बता दें कि पहले बाजार से शराब खरीदने की जिम्मेदारी बेवरेज कॉर्पोरेशन ऑफ छत्तीसगढ़ के पास थी। मगर मार्च 2020 में इस संस्था से शराब क्रय करने के सारे अधिकार 3 प्राइवेट संस्था को दे दिए गए थे। यानी कि प्राइवेट कंपनी ही बाजार से शराब खरीद सकेगी। भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन का काम बेवरेज कॉर्पोरेशन ऑफ छत्तीसगढ़ करेगी। एक बड़े भ्रष्टाचार की शुरूआत यहीं से हुई थी। सूत्र बताते हैं कि अब इस सिस्टम को बंद करते हुए ब्रेवरेज कॉर्पोरेशन को सीधे शराब खरीदकर आबकारी विभाग को दिए जाने का नियम लागू किये जाने पर विचार किया जा रहा है, इससे शराब के व्यवसाय से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा सरकार के अपने ही ब्रेवरेज कॉर्पोरेशन के खाते में आ जायेगा। इस तरीके से सरकार की आय और बढ़ जाएगी।

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विपक्ष के हमले से बचने में जुटी मौजूदा सरकार

बता दें कि भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल में सुर्खियों में आए कथित शराब घोटाले को लेकर बीजेपी विधानसभा चुनाव में हमलावर रही थी। इसके चलते नई सरकार ऐसा कोई कदम उठाने से बच रही है जिससे शराब बिक्री से होने वाली मोटी कमाई के आरोप से विपक्ष के हमले से बच सके।

इसी वजह से विष्णुदेव सरकार ने कैबिनेट बैठक में इस बार कोई नई शराब दुकाने नहीं खोलने का फैसला लिया है। दरअसल नई सरकार के सामने विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से किए गए मोदी गारंटी को पूरा करने की चुनौती है और सरकार का खजाना खाली है। इस खजाने की पूर्ति के लिए शराब बिक्री से होने वाली कमाई उसके लिए संजीवनी का काम कर सकती है। साथ ही विपक्ष को चुप कराने के लिए ये कहा जा सकता है कि शराब बिक्री की जो नीतियां लागू हैं वो पिछली सरकार के समय से लागू हैं।

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