चेन्नई। ‘सोशल मीडिया पर आरोप लगाने वाले हर व्यक्ति को सलाखों के पीछे नहीं डाला जा सकता है’ ये कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक यूट्यूबर की ज़मानत बरकरार रखने का आदेश दिया। इस यूट्यूबर पर 2021 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप था।

‘कोर्ट ने उठाया यह सवाल’

यूट्यूबर सत्ताई दुरईमुरुगन की ज़मानत रद्द करने के आदेश को खारिज करते हुए, जस्टिस अभय एस ओका और उज्जवल भुइयां की बेंच ने तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से कहा, “अगर चुनाव से पहले हम यूट्यूब पर आरोप लगाने वाले सभी लोगों को सलाखों के पीछे डालना शुरू कर देंगे, तो सोचिए कि कितने लोग जेल में होंगे?”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभियुक्त ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया।

हाई कोर्ट ने रद्द कर दी थी जमानत

मुरुगन को साल 2021 में गिरफ्तार किया गया था। मद्रास हाईकोर्ट की सिंगल जज की बेंच ने उन्हें ज़मानत दी थी लेकिन 7 जून, 2022 को हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच ने उनकी ज़मानत रद्द कर दी। ये ज़मानत इसलिए रद्द की गई क्योंकि राज्य सरकार ने उन पर अपमानजनक टिप्पणी करने से परहेज़ करने के कोर्ट की शर्त का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था।

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सुप्रीम कोर्ट ने यूट्यूबर के खिलाफ दायर उस FIR का भी संज्ञान लिया जिसमें कहा गया था कि उन्होंने बाबरी मस्जिद के विध्वंस की निंदा करते हुए एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। FIR के अनुसार वह कथित तौर पर उग्र होकर बोल रहे थे और हिरासत में लिए गए कुछ लोगों की रिहाई की मांग कर रहे थे।

कोर्ट ने इस पर कहा- “हमें नहीं लगता कि विरोध करने और अपने विचार व्यक्त करने पर यह कहा जा सकता है कि उन्हें दी गई स्वतंत्रता का दुरुपयोग हुआ है। हमारा विचार है कि ये जमानत रद्द करने का आधार नहीं बन सकते।”

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