रायपुर। कोयला घोटाले में करीब साढ़े 16 महीने से जेल में बंद सौम्या चौरसिया की जमानत अर्जी पर आज फैसला आएगा। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के केस में जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव रहीं सौम्या की जमानत 5 माह पहले सुप्रीम कोर्ट से खारिज हुई थी। तब उन्हें जेल में बंद हुए एक साल हो गए थे। उसके बाद सौम्या के वकीलों ने रायपुर में नए ग्राउंड के साथ जमानत अर्जी लगाई है। सौम्या चौरसिया ने बच्चों की देखभाल करने के लिए कोर्ट से जमानत देने की अर्जी लगाई है। कोर्ट की हर शर्त मानने को सौम्या तैयार हैं। सौम्या का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ईडी से जरूरी दस्तावेज मंगाए थे। जानकारी मिली है कि ईडी ने ये दस्तावेज जमा कर दिए। संभावना जताई जा रही है कि सौम्या को कोर्ट शर्तों के साथ जमानत देगा।

कोयला घोटाला केस में नाम आने के बाद से राज्य सेवा से सौम्या चौरसिया को निलंबित कर दिया गया था। 12 अप्रैल को कोर्ट में सुनवाई हुई। उसी दिन फैसला आना था, लेकिन कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को जमानत पर ईडी अपना तर्क प्रस्तुत करने वाली थी। तकनीकी कारणों से जमानत याचिका पर सुनवाई बढ़ाई गई है। ईडी की स्पेशल कोर्ट में जमानत याचिका लगी थी। सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज करने के बाद पहली बार निचली कोर्ट में जमानत याचिका लगी है।

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कोयला घोटाले में अब तक किसी को भी जमानत नहीं मिली है, क्योंकि ये केस कोर्ट में भी मजबूत है। फिलहाल सौम्या के अलावा कारोबारी सूर्यकांत तिवारी, आईएएस समीर बिश्नोई, आईएएस रानू साहू और कई माइनिंग अफसर भी जेल में हैं। छत्तीसगढ़ का यह पहला बड़ा मामला है जिसमें आईएएस स्तर के दो अफसर एक ही मामले में गिरफ्तार हुए हों। ईडी के अलावा राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने भी इस मामले में 30 लोगों के खिलाफ एफआईआर की है, जिसकी जांच चल रही है। जेल में बंद लोगों से इस संबंध में पूछताछ भी की गई  है।

सुपर सीएम से लेकर लेडी अमन सिंह तक रखा गया नाम

दिसंबर 2018 से लेकर नवंबर 2022 तक छत्तीसगढ़ की राजनीति और नौकरशाही में सौम्या चौरसिया, सबसे चर्चित और प्रभावशाली नाम रहा है। मंत्री-विधायक और अफसरों से जुड़े हर छोटे-बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक फ़ैसले को सौम्या चौरसिया से जोड़ा जाता रहा है. यहां तक कि मीडिया घरानो में पत्रकारों की नियुक्ति से लेकर उन्हें नौकरी से निकाले जाने तक के पीछे भी सौम्या चौरसिया की भूमिका के किस्से बताने वालों की कमी नहीं है। 15 साल की रमन सिंह सरकार में अमन सिंह को राज्य का सबसे ताकतवर अफसर माना जाता था। इसी तरत भूपेश बघेल की सरकार में सौम्या चौरसिया पॉवरफुल थीं। यही वजह है कि उन्हें ‘लेडी अमन सिंह’ तक कहा गया। मुख्यमंत्री सचिवालय में सबसे ताकतवार अफसर होने और बिना उनकी मर्जी पत्ता न हिलने की वजह से उन्हें सुपर सीएम माना जाने लगा था।

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