रायपुर। पिड़िया मुठभेड़ और बोड़गा गांव में दो बच्चियों की मोर्टार सेल के विस्फोट से हुई मौत को लेकर कांग्रेस की जांच दल के गठन के बाद भाकपा (माओ) ने इसे सरकार का नरसंहार कहा है । इंद्रावती एरिया कमेटी ने प्रेस नोट जारी कर बुध्दिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों से इन घटनाओं की निंदा कर जनांदोलन में सहयोग करने की अपील की है।

दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के प्रवक्ता विकल्प ने विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि 12 मई 2024 को दो मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत, पुलिस द्वारा दागी गई मोर्टर सेल विस्फोट से हुई। इस मौत की जिम्मेदार केन्द्र-राज्य सरकार का ही हैं, जनता पर नाजायज युध्द बंद करो। आदिवासी जनता पर बर्बर तरीके से जारी नरसंहारों को तुरंत बंद करो।

बता दें कि ठीक दो महिना पूर्व यानी 12 मार्च को बोड़गा गांव में पुलिस बल, एसटीएफ, बस्तर फाईटर्स व डीआरजी बलों द्वारा जनता पर अंधाधुंध गोलीबारी की गयी थी। इसके साथ-साथ मोर्टार सेल्स भी दागी, इसमें ग्रामीण महिला ओयाम राजे गंभीर रूप से घायल हुई थी। उस समय ओयाग राजे अपने घर परिवार वालों को खाना परोस रही थी तभी मोर्टर सेल्स पुलिस बलों द्वारा जनता पर अंधाधुंध दागा गया कुछ सेल्स विस्फोट हुआ बाकी आसपास के खेतों में गिरकर विस्फोट नहीं हुए उन्ही में से एक मोर्टर सेल को खिलौना समझकर दो मासूम बच्चों ने हाथों में लेकर खेल रहे थे उसी समय में जबरदस्त विस्फोट हुआ, जिसमें दो मासूमी बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई। जिनका नाग लक्ष्मण ओयाम, पिता मुन्ना ओयाम उम्र 13 वर्ष और बोटी ओयाम, पिता कमलु ओयाम उम्र 11 वर्ष जो की एक ही परिवार के बच्चे थे।

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यह घटना 12 मई 2024 को दोपहर के समय घटी। पुलिस द्वारा की गई इस घटना को इन्द्रावती एरिया कमेटी कड़ी निंदा करती है। इस बोड़गा गांव से अब तक 3 जानें गयी। बीजापुर एसपी जितेन्द्र यादव हमेशा की तरह इस मौके को भी माओवादियों पर दुष्प्रचार करना नहीं छोड़ रहे है, कोई भी जनपक्षदार, बुद्धीजीवियों, सामाजिक कार्यकताओं, विपक्षी पार्टियों के कार्यकर्ता इस घटना पर जनता में आके जांच करने के लिए हम आहवान करते हैं।

नक्सलियों की दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रवक्ता विकल्प ने एक प्रेस नोट में सरकार पर जनवरी से अब तक दण्डकारण्य में मुठभेड़ व क्रॉस फ़ायरिंग के नाम से 107 लोगों की हत्या करने का आरोप लगाया है। कहा गया है कि अब तक 27 घटनाओं को फ़ोर्स ने अंजाम देने का दावा किया है, इनमें 18 घटनाएं फर्जी मुठभेड़ हैं। नक्सलियों का आरोप है कि जनवरी से अब तक 40-45 ग्रामीण को मारा गया।

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प्रेस नोट में वार्ता के लिए दिए गए नक्सलियों के बयान पर सरकार की ओर से सीधा जवाब नहीं देने का आरोप लगाया। कमेटी ने तमाम संगठनों से वार्ता के लिए अनुकूल वातावरण निर्मित करने सरकार पर दबाव बनाने अपील की है।