अमरावती। आंध्रप्रदेश में पूर्ण बहुमत से अपनी सरकार बनाने के साथ ही केंद्र में NDA की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाने जा रहे तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के सुप्रीमो एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि विशाल जनादेश दे कर आंध्र प्रदेश की जनता ने जो जिम्मेदारी सौंपी है, उस पर वो पूरी तरीके से खरा उतरने की कोशिश करेंगे।

टीडीपी-जेएसपी-बीजेपी गठबंधन की भारी जीत के बाद, नायडू ने लोगों को भरोसा दिलाया कि वे उनकी सेवा करने के लिए यहां हैं। उन्होंने कहा, “हम शासक नहीं हैं। हम आपकी सेवा करने के लिए यहां हैं।” उन्होंने कहा, राज्य को फिर से पटरी पर लाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। वे एक प्लान बनाएंगे और उसी के अनुसार आगे बढ़ेंगे।

175 में से केवल 11 सीटें मिलीं सत्ताधारी दल को..!

आंध्र प्रदेश में टीडीपी-जेएसपी-बीजेपी गठबंधन ने 175 सदस्यीय विधानसभा में 164 सीटें जीतीं, जबकि प्रदेश में सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी की सीटें घटकर सिर्फ 11 रह गईं। चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी के शासन में लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसी बुनियादी आजादी से भी वंचित रखा गया। उन्होंने कहा, “अहंकार, निरंकुशता और दमन, बस यही था, लोग बर्दाश्त करने को मजबूर थे।”

टीडीपी नेताओं को झेलनी पड़ी तकलीफें

टीडीपी प्रमुख ने कहा कि पांच साल तक टीडीपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को वाईएसआरसीपी के शासन में कई तकलीफें झेलनी पड़ीं। उन्हें गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि पांच साल में जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार ने 30 साल का नुकसान कर दिया। संस्थाएं नष्ट हो गईं, अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई और भारी कर्ज ले लिया। नायडू ने वोटों के विभाजन से बचने के लिए टीडीपी के साथ हाथ मिलाने के लिए पवन कल्याण को धन्यवाद दिया। उन्होंने गठबंधन में शामिल होने के लिए भाजपा को भी धन्यवाद दिया। नायडू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राज्य भाजपा अध्यक्ष डी. पुरंदेश्वरी को धन्यवाद दिया।

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‘अब वायदों को पूरा करने की बारी’

नायडू ने कहा कि नई सरकार के पास राज्य की अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने और घोषणापत्र में किए गए वादों को लागू करने का काम है। चौथी बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे नायडू ने गठबंधन की भारी जीत का श्रेय सभी सहयोगियों के सामूहिक प्रयासों को दिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व से लेकर जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लक्ष्य हासिल करने के लिए ईमानदारी और समन्वय के साथ काम किया। 74 साल के नायडू ने दावा किया कि अपने लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने पिछले पांच सालों में जो सरकार देखी, वैसी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी थी। उन्होंने कहा, “इसने सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया।” नायडू ने दावा किया कि गठबंधन का उद्देश्य लोगों को जीत दिलाना और राज्य को फिर से खड़ा करना है।

‘विदेशों और दूसरे प्रदेशों से वोट देने आये लोग’

चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि अमेरिका में रहने वाले मतदाता अपना पैसा खर्च कर यहां वोट डालने आए। वहीं “देश के दूसरे राज्यों में दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करने वाले लोग भी वोट डालने के लिए यहां आए। मैं उनके कमिटमेंट को बयां नहीं कर सकता और मुझे नहीं पता कि उनका शुक्रिया कैसे अदा करूं।” उन्होंने कहा, “यह चुनाव टीडीपी और आंध्र प्रदेश के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जा सकता है।”

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नायडू ने सच की अपनी वह कसम

चंद्रबाबू की इस जीत के बाद लोग तीन साल पहले खाई उनकी कसम की याद दिला रहे हैं। दरअसल तब गुस्से में तमतमाए चंद्रबाबू नायडू राज्य विधानसभा से बाहर निकल आए थे और कसम खाई थी कि वह अब मुख्यमंत्री बनकर ही सदन में लौटेंगे। 19 नवंबर 2021 को चंद्रबाबू नायडू प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही मीडियाकर्मियों के सामने रोने लगे थे। उन्होंने बताया कि वह अपनी पत्नी पर की गई टिप्पणियों से आहत थे। चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि उन्होंने ढाई सालों तक सभी अपमान सहे, लेकिन जगनमोहन रेड्डी की सरकार ने सारी हदें पार कर दीं।

ले लिया ‘अपमान’ का बदला

इसी दौरान उन्होंने कसम खाई कि जब तक वह राज्य के विधानसभा चुनाव जीत नहीं जाते, तब तक वह विधानसभा में कदम नहीं रखेंगे। ऐसे में इन नतीजों के देखें तो कहा जा सकता है कि नायडू ने वाईएसआर कांग्रेस के प्रमुख जगनमोहन रेड्डी से अपने ‘अपमान’ का बदला ले लिया।

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पिछले साल सितंबर में नायडू को स्किल डेवलेपमेंट घोटाले में राज्य की सीआईडी ने गिरफ्तार किया था। नायडू को 9 सितंबर की सुबह सीआईडी वाले पकड़कर ले गए थे, जिसके बाद करीब दो महीने तक वह जेल में बंद रहे। अब राज्य का सीएम बनकर सत्ता संभालने जा रहे हैं।

कई रिकॉर्ड रच चुके हैं नायडू

आंध्र प्रदेश में अलग-अलग समय पर 13 वर्ष तक मुख्यमंत्री रहने के दौरान कई कीर्तिमान रच चुके नायडू को आईटी सेक्टर में अपने राज्य को टॉप स्थान पर ले जाने का क्रेडिट दिया जाता है। वह राज्य ही नहीं, केंद्र की राजनीति के भी कुशल रणनीतिकार रहे हैं। नायडू ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे को लेकर मार्च, 2018 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से नाता तोड़ लिया था लेकिन वर्ष 2019 के विधानसभा व लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार ने उनके सियासी भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए थे। हालांकि इस बीच उन्होंने एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और प्रचंड जीत दर्ज की।