सुकमा। छत्तीसगढ़ शासन की “छत्तीसगढ़ नक्सलवाद उन्मूलन एवं पुनर्वास नीति” एवं नेल्ला नार” योजना से प्रभावित होकर तथा अंदरूनी क्षेत्रों में लगातार नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित कर पुलिस के बढ़ते प्रभाव से प्रभावित होकर नक्सली लगातर आत्मसमर्पण कर रहे है।

इसी कड़ी में सुकमा जिले में एक महिला समेत दो हार्डकोर नक्सली ने आत्मसमर्पण किया। पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण व सीआरपीएफ डीआइजी सूरजपाल वर्मा के समक्ष सरेंडर किया है।

पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया आत्मसमर्पित महिला सोडी मंजुला लगभग 22-23 वर्ष से माओवादी संगठन में सक्रिय है। वो पोलमपल्ली एलओएस कमाण्डर एवं पोलमपल्ली सिविल ऑर्गनाईजेशन कमाण्डर रही है एवं पुरूष माओवादी सोडी गजेंद्र लगभग 14-15 वर्षों तक माओवादी संगठन में सक्रिय है। वो कोण्टा एरिया कमेटी सदस्य/एर्राबोर सिविल ऑर्गनाईजेशन कमाण्डर रहा है।

उन्होंने बताया दोनों ही माओवादी संगठन में सक्रिय रहकर कई बड़ी-बड़ी माओवादी घटनाओं में शामिल रहे है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पदों के अनुरूप दोनों माओवादियों पर 05-05 लाख कुल 10 लाख रूपये का ईनाम घोषित है।

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पुलिस अधीक्षक ने आगे बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा बताया गया कि नक्सल संगठन द्वारा ग्रामीणों पर काफी अत्याचार किया जा रहा है और विकास को अवरोध किया जा रहा है। इसके साथ ही उनकी जो पुरानी मानसिकता है उसे परेशान हो कर इन्होने आत्मसमर्पण किया है। नक्सलियों द्वारा यह भी बताया कि बहुत सारे नक्सली नाखुश है। बहुत जल्द आत्मसमर्पण कर सकते है।

गौतलब है कि दोनों आत्‍मसमर्पित नक्‍सलियों को शासन की पुनर्वास नीति का लाभ दिया जाएगा।