नेशनल डेस्क। अंतर्राष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस हर साल 3 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य दुनिया भर में प्लास्टिक बैग के उपयोग को कम करना और उनके पर्यावरणीय प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। प्लास्टिक बैग, जो आमतौर पर एकल-उपयोगी होते हैं, हमारे पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। पॉलीथिन जमीन के अंदर दबी होने के बावजूद करीब 100 साल तक इसका विघटित नहीं होता और यही पॉलीथिन 100 साल बाद भी जमीन के अंदर से जस का तस बनी रही है। आसानी से नहीं सड़ते और जल, भूमि, और समुद्री जीवन को गंभीर नुकसान पहुँचाते हैं।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की बात करे तो यहां के 70 वार्डों से अभी रोजाना 450 टन कचरा उठाया जाता है। यह कचरा घरों, दुकानों, मॉल, रेस्त्रां,होटलों से लेकर नाले-नालियों से निकलता है। जिसमे से अनुमान के तहत करीब सात से आठ फीसद पॉलीथिन होती है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने 20 माइक्रान तक की पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगा रखा है, लेकिन अब भी खुलेआम बिक रही है। सब्जी बाजार से लेकर किराना दुकान, कपड़ा मार्केट तक में धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। पॉलिथिन के साथ-साथ डिस्पोजेबल आइटम पर भी प्रतिबंध जरूरी है।

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प्लास्टिक बैग का प्रभाव

पर्यावरणीय प्रदूषण: प्लास्टिक बैग बहुत ही धीमी गति से विघटित होते हैं, जिसके कारण वे भूमि और जल स्रोतों में जमा होते रहते हैं। वे मिट्टी की गुणवत्ता को खराब कर सकते हैं और जल स्रोतों को प्रदूषित कर सकते हैं।

वन्यजीवों पर प्रभाव: समुद्री और भूमि पर रहने वाले जानवर अक्सर प्लास्टिक बैग को भोजन समझकर खा लेते हैं, जिससे उनकी मृत्यु हो सकती है। इसके अलावा, वे इन बैगों में फँस भी सकते हैं, जिससे उनकी हिलने-डुलने की क्षमता बाधित होती है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव: प्लास्टिक के सूक्ष्म कण (माइक्रोप्लास्टिक्स) भोजन और पानी में मिलकर मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकते हैं। ये कण शरीर में प्रवेश करके विभिन्न रोगों का कारण बन सकते हैं।

समाधान और प्रयास

पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण : प्लास्टिक बैग का उपयोग करने की बजाय, कपड़े के थैले, जूट बैग, या कागज के थैलों का उपयोग करना चाहिए। यदि प्लास्टिक का उपयोग करना आवश्यक हो, तो सुनिश्चित करें कि इसे सही तरीके से पुनर्चक्रण के लिए भेजा जाए।

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शिक्षा और जागरूकता : लोगों को प्लास्टिक के हानिकारक प्रभावों के बारे में शिक्षित करना महत्वपूर्ण है। स्कूल, कॉलेज, और समुदायिक संगठनों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा सकते हैं।

रकारी नीतियाँ : कई देशों ने प्लास्टिक बैग के उपयोग पर प्रतिबंध या टैक्स लगाए हैं। ऐसी नीतियों को बढ़ावा देना और उनका पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।

सफल कहानियाँ

केन्या: केन्या ने 2017 में प्लास्टिक बैग पर दुनिया का सबसे कठोर प्रतिबंध लगाया। इस कदम ने प्लास्टिक प्रदूषण में काफी कमी लाई है।

भारत: भारत उन 124 देशों में शामिल था, जिन्होंने प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने के लिये निर्माण से लेकर निपटान तक प्लास्टिक के संपूर्ण जीवन को संबोधित किया और साथ ही संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा के प्रस्ताव का मसौदा तैयार करने हेतु वर्ष 2022 में एक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किये थे। यह समझौता अंततः हस्ताक्षरकर्त्ताओं के लिये कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाएगा।

यूरोप: यूरोप के कई देशों ने भी प्लास्टिक बैग के उपयोग पर प्रतिबंध या शुल्क लगाया है, जिससे प्लास्टिक कचरे में कमी आई है।

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