नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर जस्टिस खन्ना के नाम की घोषणा होने के बाद से ही अब वह प्रोटोकॉल को फॉलो करने के लिए बाध्य हैं। इस प्रोटोकॉल का सीधा असर उनके मॉर्निंग वॉक पर भी पड़ा है।

अकेले ही सैर पर निकलने की है आदत

दिल्ली की सड़कों पर खुद कार चलाते हुए अपने स्कूल-कॉलेज के दोस्तों के घर पहुंच जाना हमेशा से उनकी फितरत रही है। दिल्ली की सड़कें उनके लिए कभी अनजान नहीं रहीं हैं। जस्टिस खन्ना से जुडे़ सूत्रों के मुताबिक वो हमेशा ही अकेले सुबह की सैर करने निकलते थे। वो ज्यादातर समय लोधी गार्डन में दस किलोमीटर की वॉक करते थे। उनका हमेशा ही ये मानना रहा कि उनको कौन जानता है .

जस्टिस संजीव खन्ना को दी गई है सलाह

CJI का नोटिफिकेशन आने के बाद अब उनको सलाह दी गई कि वो अकेले सैर पर ना जाएं बल्कि सुरक्षा कर्मी के साथ जाएं .लेकिन जस्टिस खन्ना ने तय किया कि वो PSO के साथ सैर करने नहीं जाएंगे.दिल्ली के बाराखंभा रोड स्थित मॉडर्न स्कूल के बाद सेंट सेटीफन कॉलेज से स्नातक और फिर डीयू के कैंपस लॉ सेंटर से लॉ की डिग्री लेने वाले जस्टिस संजीव खन्ना दिल्ली के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं और आज भी अपने स्कूल, कॉलेज और CLC के दोस्तों के संपर्क में हैं. यहां तक कि वो खुद निजी कार चलाते हुए छुट्टी के दिन अपने दोस्तों से मिलने चले जाते हैं . वो हमेशा कहते हैं कि मुझे कौन पहचानता है.उनके दोस्त कहते हैं कि जस्टिस खन्ना आज तक ऐसे ही हैं.जरा भी नहीं बदले वो सीधे-सरल,शांत,पब्लिसिटी से दूर रहना पसंद करते हैं.

See also  BIG BREAKING : यूपी के कुख्यात अपराधी गुड्डू मुस्लिम की छत्तीसगढ़ में भी हो रही है तलाश, उड़ीसा के रास्ते महासमुंद इलाके में छिपने की आशंका

वोट डालने आये, किसी ने पहचाना नहीं..!

वहीं,उनका पब्लिसिटी से दूर रहने का एक उदाहरण ये भी है कि मई में लोकसभा चुनाव के लिए वोटिंग के दौरान तमाम मीडिया कैमरे दिल्ली के निर्माण भवन केंद्र पर जस्टिस संजीव खन्ना का इंतजार कर रहे थे, लेकिन वो अपनी निजी कार को खुद चलाते हुए वोटिंग सेंटर पर गए और वोट डालकर चले आए जबकि कोई उनको पहचान नहीं पाया।