टीआरपी डेस्क। फलों और सब्जियों में केमिकल का उपयोग कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब पुराने आलू को अमोनिया केमिकल से नया बनाकर बेचा जा रहा है। उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों में आलू उत्पादन जारी है, लेकिन किसान बता रहे हैं कि अभी नए आलू की खुदाई शुरू नहीं हुई है। इसके बावजूद दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में ‘नया आलू’ बाजार में बिक रहा है। दरअसल, यह आलू पुराने स्टॉक को केमिकल से नया बनाया गया है।

कैसे बनता है ‘नया’ आलू?

आलू को नया बनाने के लिए अमोनिया का उपयोग किया जा रहा है। व्यापारी अमोनिया को पानी में घोलकर उसमें पुराने आलू को 14-15 घंटे के लिए डुबो देते हैं। इससे आलू का छिलका पतला हो जाता है और आसानी से उतरने लगता है। इसके बाद आलू को सुखाकर मिट्टी में डाल दिया जाता है। यह नया आलू बाजार में अधिक कीमत पर बेचा जाता है।

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इस प्रक्रिया से न केवल आलू की शक्ल-सूरत बदल जाती है, बल्कि उसका वजन भी बढ़ जाता है, जिससे व्यापारी मुनाफा दोगुना कर लेते हैं।

सेहत पर असर

केमिकल से तैयार आलू सेहत के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है। अमोनिया के लगातार सेवन से दिमागी सेहत पर असर पड़ सकता है और यह अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

असली और नकली आलू की पहचान कैसे करें?

असली नया आलू मिट्टी से ढका होता है और उसे पानी में धोने पर मिट्टी पूरी तरह नहीं निकलती। केमिकल वाले आलू की मिट्टी पानी में डालते ही घुल जाती है।असली नया आलू काटने पर पानी नहीं छोड़ता, जबकि केमिकल वाले आलू को काटने पर किनारों से पानी निकलता है।

किसानों का कहना है कि आलू की फसल फरवरी तक तैयार होगी। अभी सिर्फ घरेलू उपयोग के लिए ही खुदाई हो रही है। ऐसे में बाजार में बिक रहा ‘नया आलू’ हकीकत में पुराने आलू का केमिकल से तैयार संस्करण है।

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