बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को प्रतिनियुक्ति पर भेजने से पहले उनकी सहमति लेना आवश्यक है। बिना सहमति के प्रतिनियुक्ति आदेश जारी नहीं किया जा सकता। जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने राज्य शासन के ऐसे ही दो आदेशों पर रोक लगा दी है।

नगर पालिका के CMO ने दायर की है याचिका

कुम्हारी नगरपालिका के CMO एनआर चंद्राकर ने अधिवक्ता संदीप दुबे के माध्यम से याचिका दायर कर अपने तबादला आदेश को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया कि राज्य शासन ने उनका तबादला रायपुर नगर निगम में उपायुक्त के पद पर कर दिया है, जबकि उनकी जगह पाटन में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक को कुम्हारी के सीएमओ पद पर नियुक्त किया गया है। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि सहायक उप निरीक्षक को सीएमओ के पद पर नियुक्त करना नियमों के विपरीत है।

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मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता संदीप दुबे ने कहा कि इससे पहले भी याचिकाकर्ता को रायपुर नगर पालिका परिषद में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया था, जहां उन्होंने पांच साल तक सेवा दी। प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद उन्हें वापस मूल पदस्थापना स्थान पर भेजा गया, लेकिन आठ महीने बाद फिर से उसी स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया।

राज्य शासन ने दी ये दलील

राज्य शासन की ओर से महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि राज्य सरकार नगर पालिका परिषद के किसी भी कर्मचारी को नगर निगम में स्थानांतरित कर सकती है। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और आदेशों पर रोक लगा दी।

सिंगल बेंच ने अपने आदेश में कहा कि बिना सहमति के प्रतिनियुक्ति आदेश जारी करना अनुचित है। कोर्ट ने राज्य शासन को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।

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