रायपुर। शिक्षा विभाग भले ही हर वर्ष शिक्षकों के अटैचमेंट को नियम विरुद्ध बताते हुए सभी DEO को पत्र जारी कर देता है कि अगर कोई अटैचमेंट किया हो तो उसे तत्काल रद्द करते हुए शिक्षक को मूल शाला में पदस्थ किया जाये। मगर सच तो यह है कि सभी जिलों में साल भर शिक्षकों के अटैचमेंट का खेल चलता रहता है और इसकी आड़ में जमकर रिश्वतखोरी की जाती है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक शिक्षिका की याचिका पर उसके अटैचमेंट को रद्द करते हुए टिप्पणी की है कि यह राज्य शासन के नियमों के विपरीत एवं अवैधानिक है।

क्या है मामला..?

मिली जानकारी के मुताबिक हेमलता ध्रुव बस्तर के बकावंड स्थित कस्तूरबा गांधी गर्ल्स स्कूल में अंग्रेजी विषय के व्याख्याता के रूप में कार्यरत हैं। जिला शिक्षा अधिकारी जगदलपुर ने 20 जनवरी 2025 को आदेश जारी कर उनको कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय बकावंड से हाई स्कूल मोहलाई में अटैच कर दिया। जिस स्कूल में उनको अटैच किया, वह वर्तमान पदस्थापना स्थान से 60 किलोमीटर दूर है। जबकि किसी कर्मचारी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर अटैच करने पर पूर्ण प्रतिबंध है।

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24 साल पुराना है अटैचमेंट को लेकर आदेश

इस संदर्भ में 4 जून 2001 को राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने परिपत्र भी जारी किया है, जिसके अनुसार कर्मचारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर अटैच नहीं किया जा सकता। अपने अटैचमेंट को याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता के माध्यम से चुनौती देकर कहा कि शिक्षिका को उनके वर्तमान पदस्थाना स्थल से शासकीय हाईस्कूल मोहलाई में अटैच किया जाना राज्य शासन के नियमों के विपरीत और अवैधानिक है।

राज्य सरकार ने किसी भी कर्मचारी के संलग्नीकरण पर प्रतिबंध लगा दिया है, इसलिए डीईओ का आदेश राज्य के नियमों के भी विपरीत और आपत्तिजनक है। यह आदेश रद्द किया जाना चाहिए। सुनवाई के बाद जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने अटैचमेंट आदेश को रद्द करने के निर्देश दिए। हालांकि कोर्ट ने संबंधित अधिकारी को याचिकाकर्ता के खिलाफ नियम अनुसार उचित आदेश पारित करने की छूट दी है। इस निर्देश के साथ कोर्ट ने याचिका निराकृत कर दी।

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बड़े पैमाने पर हो रहा है अटैचमेंट

प्रदेश में सरकार भले ही जीरो टॉलरेंस की बात करती है, मगर शासकीय विभागों में जिस तरह काम चल रहा है, उसे देखकर इस तरह की कोई बात नजर नहीं आती। प्रदेश के शिक्षा विभाग में तो मानो सारे नियम-कायदों को ताक पर रख दिया गया है। यहां शिक्षकों और कर्मियों का अटैचमेंट तो एक छोटी सी चीज है, इसके अलावा पदोन्नति, पदस्थापना और स्थानांतरण के नाम पर बड़ा खेल चलता है, जो जगजाहिर है।

विभाग में एकल शिक्षकीय स्कूलों में शिक्षकों का अटैचमेंट तो व्यवस्था के तहत किया ही जा रहा है, मगर इसकी आड़ में शिक्षकों और व्याख्याताओं को उनके मन मुताबिक स्कूलों में संलग्न भी किया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि शिक्षा विभाग के मुख्यालय को इसकी जानकारी नहीं, मगर जानते हुए भी कोई कार्यवाही अथवा संबंधित अटैचमेंट को रद्द करने का कोई आदेश जारी नहीं किया जाता।

शिक्षकों की कमी की यह भी है एक वजह

प्रदेश के अधिकांश जिलों में DEO याने जिला शिक्षा अधिकारी प्रभार पर चल रहे हैं और इनके द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से शिक्षकों की पदस्थापना और अटैचमेंट किया जा रहा है, और यही वजह है कि इसके चलते कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो जाती है। अधिकांश शिक्षक चाहते हैं कि शहर अथवा उसके आसपास के स्कूलों में उनकी पदस्थापना हो, और वे इसके लिए मोटी रकम खर्च करने को तैयार रहते हैं। उन्हें मन मुताबिक स्कूलों में पदस्थ कर भी दिया जाता है।
ऐसे में दूर दराज के स्कूलों में शिक्षकों की कमी होना स्वाभाविक है। और इसी समस्या से पूरा प्रदेश जूझ रहा है, जिसे राज्य सरकार चाहकर भी सुलझा नहीं पा रही है।

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अटैचमेंट की गई शिक्षिका को लेकर हाई कोर्ट ने जो फैसला किया है, अगर उसका सही मायने में पालन किया जाये तो इससे प्रदेश भर में ऐसे सैकड़ों शिक्षक प्रभावित होंगे जिनको नियमविरुद्ध तरीके से दूसरे स्कूलों में अटैच कर दिया गया है। बहरहाल देखना है कि शिक्षा विभाग के सचिव और DPI हाई कोर्ट के इस फैसले को कितनी गंभीरता से लेते हैं।