बिलासपुर। प्रदेश भर में खुले में घूमने वाले आवारा मवेशी आम–अवाम के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। इनके चलते हो रहे सडक हादसों से हाईकोर्ट भी चिंतित है और पिछले कई वर्षो से इस मामले में जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है। जब भी सुनवाई की तारीख नजदीक आती है, आवारा मवेशियों को लेकर जिलों में बैठकों का दौर शुरू हो जाता है। ऐसी ही एक बैठक न्यायधानी बिलासपुर में हुई, जिसमें एसपी ने कहा कि अगर मवेशी के चलते कोई सडक हादसा हुआ तो उसके मालिक जेल जायेंगे।

बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल एवं एसपी रजनेश सिंह ने आवारा पशु प्रबंधन को लेकर अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने सभी पशु मालिकों को अपना जानवर अपनी देखरेख और निगरानी में रखने को चेताया है। कहा गया कि मवेशी आवारा छोड़ने पर भारी जुर्माना किया जाएगा। एसपी ने कहा कि मवेशियों के कारण सड़क दुर्घटना होने पर पशु मालिक को भी सह आरोपी बनाया जाएगा और वे जेल जायेंगे। बैठक में जिले के सभी एसडीएम, जनपद पंचायत सीईओ, जोन कमिश्नर और नगरपालिका अधिकारी, पशु चिकित्सा विभाग और ट्रैफिक पुलिस उपस्थित थे।

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सड़कों पर गश्त लगाकर मवेशियों को हटाएं

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने इस मौके पर कहा कि बरसात में सड़कों पर मवेशियों के बैठ जाने से दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। सभी विभाग आपस में मिलकर इसे रोकने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि शहरों में ऐसे जगह चिह्नित करें, जहां मवेशी ज्यादा बैठे होते हैं। उन क्षेत्रों में लगातार गश्त कर उन्हें हटाएं। मवेशी मालिकों का पता लगाकर उनसे संपर्क करें और समझाइश दें कि मवेशी को अपनी निगरानी में रखें। खुले में न छोड़ें।

आवारा मावेशियों के लिए बनाये जायेंगे आश्रय स्थल

एक सर्वे के अनुसार बिलासपुर में लगभग 4 हजार जानवर खुले में विचरण करते पाए गए हैं। मालिक के सामने नहीं आने पर इन्हें पशु आश्रय स्थलों में रखा जायेगा।

शहर और आसपास के ग्रामों में आधा दर्जन से ज्यादा आश्रय स्थल विकसित किए जाएंगे। शहर के मोपका, कोनी, गोकुलधाम, सहित रहँगी,धौराभांठा, पाराघाट, लावर, काटाकोनी में पशु आश्रय स्थल बनाए जाएंगे। डीएमएफ से शेड, पानी के लिए आवंटन दिए जाएंगे। आश्रय स्थल में रखे पशुओं के लिए चारे का इंतजाम भी होगा। पशु कल्याण समिति से चारा की व्यवस्था की जाएगी। दानदाताओं से भी चारे में सहयोग की अपील की गई है।

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एनएचएआई को दी यह जिम्मेदारी

कलेक्टर ने कहा कि सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी एनएचएआई की है। उसे सड़क के किनारे पशुओं को रखने के लिए भूमि आरक्षित रखने को कहा है।

गौ अभ्यारण योजना का क्या हुआ..?

प्रदेश में पूर्व की भूपेश बघेल सरकार द्वारा शुरू किये गए गौठान बंद हो गए, अब नई सरकार ने प्रदेश भर में इसी तर्ज पर गौ अभ्यारण बनाने की घोषणा की थी, मगर यह योजना अब तक धरातल पर नहीं आयी है। उधर जगह–जगह बने कांजी हाउस में अव्यवस्था का आलम है और जगह की कमी है। ऐसे में जिन मवेशियों को बेकार समझकर उनके मालिकों ने खुले में छोड़ दिया है, उनकी संख्या हजारों –लाखों तक पहुँच गई है। ऐसे मवेशी ही आम अवाम के लिए मुसीबत बन गए हैं।प्रशासन भले ही खुले में घूमने वाले मवेशियों के लिए फरमान जारी कर देता है, मगर इन मावेशियों को पकड़कर रखने के लिए प्रदेश भर में कोई माकूल इंतजाम अब तक नहीं किया गया है। बिलासपुर जिला प्रशासन भले ही इन मवेशियों के लिए आश्रय स्थल बनाने की बात कह रहा है, मगर ऐसे स्थलों के लिए चारे का इंतजाम करना सबसे बड़ी समस्या होती है। ऐसे में गौसेवा का दम भरने वाले गौरक्षक संगठनों को भी आगे आना चाहिए, जो अक्सर मवेशी तस्करी को मुद्दा बनाकर बवाल खड़ा करते हैं।

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