जशपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृहग्राम बगिया स्थित हॉस्टल में सर्पदंश से एक छात्र की मौत हो गई। इस मामले में हॉस्टल अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया। वहीं मंडल संयोजक को हॉस्टल की अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार मानते हुए कारन बताओ नोटिस जारी किया गया है।

कलेक्टर रोहित व्यास ने कांसाबेल के प्रभारी मण्डल संयोजक फकीर यादव जिला-जशपुर (छ.ग.) को कारण बताओ जारी किया है। पत्र में उल्लेख है कि ग्रीष्म ऋतु के पश्चात् दिनाँक 15.06.2025 से विभागीय छात्रावास/आश्रमों का संचालन किया जा रहा है। वर्षा ऋतु प्रारंभ हो चुकी है, फलस्वरूप छात्रावास-आश्रमों के आस-पास जहरीले जीव-जन्तु घुमते रहने की संभावना रहती है। अनुसूचित जनजाति आश्रम, बगिया का अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), बगीचा, जिला-जशपुर (छ.ग.) द्वारा आकस्मिक निरीक्षण किया गया, जिसमें आश्रम की खिड़कियों का कांच टूटा हुआ पाया गया। आश्रम परिसर के बाउण्ड्री के किनारे लंबी घांस एवं झाड़ी पायी गई, जिसकी नियमित कटाई-छंटाई नहीं होना पाया गया है। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि आश्रम में निवासरत समस्त छात्रों के बिस्तरों के नीचे साफ-सफाई 03-04 दिनों से नहीं की गई।

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पत्र में उल्लेख है कि अनुसूचित जनजाति बालक आश्रम, बगिया की नियमित रूप से साफ-सफाई नहीं होने के कारण दिनाँक 08.07.2025 को आश्रम में निवासरत कक्षा तीसरी के विद्यार्थी अमृत साय को सांप के काटने से मृत्यु हो गई, जिसकी सूचना आपके द्वारा अपने उच्चाधिकारियों को समय पर नहीं दी गई। आप विकास खण्ड कांसाबेल के प्रभारी मण्डल संयोजक का कार्य सम्पादन कर रहे हैं। उपरोक्त उल्लेखित स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि आपके द्वारा नियमित रूप से छात्रावास-आश्रमों का निरीक्षण नहीं किया जाता और न ही छात्रावास आश्रमों के साफ-सफाई एवं व्यवस्था के संबंध में अधीक्षकों को निर्देश दिया जाता है। इस प्रकार आपके द्वारा अपने कर्त्तव्यों एवं दायित्वों का जिम्मेदारी से निर्वहन नहीं किया जा रहा है। आपका उक्त कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम-1965 के नियम-3 के विपरीत है। अतः क्यों न आपके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावे। उक्त संबंध में अपना समाधान कारक जवाब 03 दिवस के अंदर प्रस्तुत करें। समयावधि में एवं सम्प्रेष्यन कारक जवाब प्राप्त न होने की दशा में अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावेगी।

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कलेक्टर के इस पत्र से माना जा रहा है कि हॉस्टल अधीक्षक के बाद मंडल संयोजक का भी निलंबन तय है। इस मामले में मंडल संयोजक के जवाब और कलेक्टर की कार्यवाही का इंतजार है।

इस मामले का सोचनीय पहलु यह है कि जब मुख्यमंत्री के इलाके के हॉस्टल का यह हाल है तो दूर-दर्ज के गांवों में स्थित दूसरे छात्रावासों का क्या हाल होगा। छत्तीसगढ़ में विशेषकर आदिवासी छात्रावासों की हालत काफी बदतर है। और इसकी वजह से पूर्व में भी छात्रों की बिमारी और अन्य वजहों से मौत की ख़बरें प्रकाश में आ चुकी हैं।