धमतरी। मय की खपत को लेकर मशहूर छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला अब नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। दरअसल छत्तीसगढ़ में भी अब मखाने की खेती की जाएगी। जिसकी शुरुआत धमतरी से होने जा रही है। इसके लिए धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा की पहल पर जिले के 200 एकड़ के क्षेत्र में मखाना की खेती करने की योजना बनाई जा रही है। इस योजना को शुरू करने के लिए कलेक्टर खुद कई गांवों का निरीक्षण कर रहे है। उनका मानना ​​है कि, अगर यह योजना सफल रही तो धमतरी जिले को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। जिसके लिए पूरे जिले में अभियान चलाया जा रहा है। इस योजना का लाभ विशेषकर निषाद समाज के लोगों को मिलेगा।

जिले के कई जल स्त्रोतों में मखाना उत्पादन को तेजी से बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। शहर के तालाबों के साथ ही अब उन इलाकों में भी मखाना उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है जहां पहले कमल ककड़ी की खेती होती थी। हाल ही में कलेक्टर ने छाती गांव में करीब 5 एकड़ तालाब का निरीक्षण किया। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से मखाना की खेती के वैज्ञानिक तरीकों पर चर्चा की।

उन्होंने स्थानीय लोगों को मखाना की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के विशेषज्ञों को निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि, किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण भी दिया जाए। कलेक्टर ने कहा कि जिला प्रशासन इंदिरा गांधी कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से मखाना का उत्पादन कर रहा है। जिसके बाद मखाना के प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग की दिशा में भी मजबूती से काम किया जाएगा। मखाना की ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग के लिए “धनहा धमतरी” नाम से योजना तैयार हो रही है। ताकि इस योजना के सफल प्रायोजन से जिले को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और किसानों को अच्छा आर्थिक लाभ हो सके।

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बिहार के बाद दूसरा सबसे बड़ा मखाना उत्पादन केंद्र बनेगा धमतरी

केंद्र सरकार के बजट सत्र 2025 में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिहार में मखाना बोर्ड की स्थापना का प्रस्ताव रखा था। बिहार में मखाने की अत्यधिक खेती इस पहल का बहुत बड़ा कारण रहा। मखाना बोर्ड के गठन के बाद बिहार सालाना तकरीबन 4 से 5 हजार करोड़ का व्यवासय मखाने के उत्पादन से करता है। और इस योजना के शुरू होने से बिहार के किसानों को अर्थिक लाभ के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर की पहचान भी मिल रही है।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा बिहार की ही तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी मखाना उत्पाद को बढ़ावा देने की ओर काम कर रहे हैं। इस पहल से छत्तीसगढ़ के किसानों को भी आर्थिक लाभ समेत राष्ट्रीय पहचान मिलेगी और छत्तीसगढ़ देश का दूसरा सबसे बड़ा मखाना उत्पादक राज्य भी बन सकता है।

मखाना खेती से किसानों को दोगुना लाभ

कृषि वैज्ञानिक डॉ. गजेंद्र चंद्राकर ने बताया कि ‘धमतरी जिले का मौसम और निचले इलाकों के खेत मखाना की खेती के लिए आदर्श हैं। धान की तुलना में मखाना की खेती से किसानों को दोगुना लाभ मिल सकता है। एक एकड़ में धान उगाकर जहां किसानों को 75,000 रूपए का लाभ होता है, वहीं मखाना से किसान 1.5 लाख से 3 लाख रुपए तक कमा सकते हैं।’

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मखाने की खेती में केंद्र सरकार भी सहयोगी

मखाना की खेती के लिए राष्ट्रीय बागवानी मिशन जैसी योजनाओं के तहत किसानों को वित्तीय सहायता दी जा रही है। बिहार में मखाना विकास योजना के तहत प्रति हेक्टेयर 72,750 रुपए की सब्सिडी उपलब्ध है। मखाना को GI टैग मिलने से इसकी गुणवत्ता और बाजार मूल्य भी बढ़ने लगा है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कृषि विभाग को मखाना बोर्ड से अनुदान के लिए मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता लेने के निर्देश भी दिए हैं।

10 क्विंटल होगा औसत उत्पादन

मखाना की खेती पानी से भरे खेतों में की जाती है और यह छह महीने की फसल होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक एकड़ में खेती की लागत 50,000 से 60,000 रुपए तक आती है, जिसमें बीज, रोपण, और देखभाल शामिल है। प्रोसेसिंग की लागत जोड़ने पर यह बढ़ सकती है। एक एकड़ में करीब 4,000 पौधे लगाए जाते हैं, जिससे औसतन 10 क्विंटल उत्पादन होता है। फसल मार्च में बोई जाती है और सितंबर में कटाई होती है, जबकि दूसरी फसल सितंबर-अक्टूबर में बो कर फरवरी-मार्च में तैयार होती है। इसलिए आगामी सीजन में ही धमतरी में मखाने की खेती के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई है।

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मखाना की खेती के लिए छत्तीसगढ़ के धमतरी में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा की यह पहल खेती में नवाचार का उदाहरण है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन और केंद्र की योजनाएं इसे वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में काम कर रही हैं। यदि इसी गति और योजनाबद्ध तरीके से काम होता रहा तो मखाना जल्द ही भारतीय कृषि का एक जाना-पहचाना ब्रांड बन सकता है। जो किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि लाएगा और समाज को अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करेगा। इस दिशा में सही प्रयास और समन्वय जारी रहा, तो ‘धान का कटोरा’ के नाम से जाना जाने वाला छत्तीसगढ़ मखाना उत्पादन के लिए भी एक नई पहचान बन सकता है।