कवर्धा। शासकीय स्कूलों की बदहाली और शिक्षकों की लापरवाही के मामले लगातार सामने आ रहे हैं लेकिन इसी सिस्टम में कुछ ऐसे शिक्षक भी मौजूद हैं जो वाकई समाज के उद्धार और बच्चों की शिक्षा के प्रति कर्तव्यनिष्ठ हैं। इसके साथ ही नवाचार के जरिए बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित कर उनकी भलाई के लिए कार्य कर रहे हैं।

कवर्धा के शासकीय मीडिल स्कूल में पदस्थ शिक्षक पूनाराम पनागर को पूरे जिले में सेलून वाले गुरुजी के नाम से जाने जाते हैं। इन्हें लोग सेलून वाले गुरुजी के नाम से इसलिए जानते हैं क्योंकि ये स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के बालों की निःशुल्क कटिंग करते हैं। और इस नेक पहले के पीछे सेलून वाले गुरुजी का मकसद सिर्फ बाल काटकर बच्चों को सभ्यता से रहना सिखाना नहीं हैं। आइए जानते है शिक्षक पूनाराम पनागर की पूरी कहानी।

जिले के बोड़ला के पूर्व माध्यमिक स्कूल में शिक्षक पूनाराम बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ उनके बाल भी काटते हैं। इससे बचाए गए पैसों से बच्चों को कॉपी खरीदने को कहते हैं। पूनाराम बताते हैं की “मैं बोड़ला के महलीघाट गांव के प्रायमरी स्कूल में था। इस आदिवासी क्षेत्र में सेलून नहीं थे। ऐसे में स्कूल के बच्चों के बाल काफी बढ़ जाते थे। तब मैंने 2012 से खुद ही बच्चों के बाल काटना शुरू किया। बाद में मेरा ट्रांसफर यहां बोड़ला के स्कूल में हो गया। यहां भी सरकारी हॉस्टल में रहने वाले बच्चे गरीब परिवारों से हैं। ऐसे में मैं उनके भी बाल महीने में एक बार काटने लगा।”

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पूनाराम पनागर सरकारी SC-ST हॉस्टल के बच्चों के बाल महीने में किसी एक रविवार को काटते हैं। इसके बदले वे बच्चों से कटिंग के बचाए हुए पौसों से कॉपी खरीदने को कहते हैं। पनागर इसके आलावा भी सरकारी स्कूल के पहली से दसवीं क्लास के बच्चों को 15 साल से स्कूल के अलावा फ्री कोचिंग भी दे रहे हैं। वे हर साल पर्चा छपवाकर इलाके में बंटवाते हैं कि लोग अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूल में ही कराएं। शिक्षक की इस पहल के न सिर्फ बच्चे बल्कि अन्य शिक्षक और अभिभावक भी दीवाने हैं।

पूनाराम पनागर जैसे शिक्षक ही इस भ्रष्ट सिस्टम में उम्मीद की करण है। पनागर द्वारा सामाजिक विकास के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में दी जा रही निःस्वार्थ सेवाएं बेहद सराहनीय है, जो देश के भविष्य को उज्जवल बनाने की ओर एक सराहनीय पहल है।