टीआरपी डेस्क। जनता दल (सेक्युलर) के पूर्व सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना को बेंगलुरु की विशेष अदालत ने बलात्कार के एक मामले में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2) और 376(2)(N) के तहत फैसला सुनाते हुए रेवन्ना पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जिसमें से 7 लाख पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे।
रेवन्ना पर यह मामला उनके परिवार के गन्नीकदा फार्महाउस में काम करने वाली 48 वर्षीय घरेलू सहायिका द्वारा दर्ज कराया गया था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि कोविड लॉकडाउन के दौरान 2021 में प्रज्वल ने हासन और बेंगलुरु में दो बार उसका यौन शोषण किया और घटना का वीडियो भी रिकॉर्ड किया।
फॉरेंसिक सबूत और डीएनए रिपोर्ट से साबित हुआ अपराध
विशेष जांच दल (SIT) ने मई 2024 में प्रज्वल रेवन्ना को गिरफ्तार किया था। अदालत में पेश की गई 1,632 पेज की चार्जशीट में डीएनए और फॉरेंसिक रिपोर्ट भी शामिल थी। पीड़िता के कपड़ों पर रेवन्ना के डीएनए के निशान मिलने से उसकी भूमिका साफ हुई।
कोर्ट में फूट-फूटकर रोए रेवन्ना
1 अगस्त को दोषी करार दिए जाने के बाद रेवन्ना कोर्ट परिसर में ही भावुक हो गए थे। जज संतोष गजानन भट ने शनिवार को सजा का ऐलान करते हुए कहा कि यह मामला सिर्फ यौन अपराध का नहीं, बल्कि सत्ता, प्रभाव और भरोसे के दुरुपयोग का भी है।
पेन ड्राइव से खुला मामला, वीडियो लीक के बाद बढ़ा विवाद
अप्रैल 2024 में एक पेन ड्राइव में 2,000 से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो वायरल हुए, जिनमें रेवन्ना की मौजूदगी की आशंका जताई गई। इसके बाद मामला तूल पकड़ा और चुनाव से पहले वे जर्मनी भाग गए। 31 मई को बेंगलुरु लौटते ही उन्हें एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया।
कोर्ट ने ठुकराईं जमानत याचिकाएं
प्रज्वल ने अपने बचाव में कहा कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है और चुनाव के समय इसे उछाला गया। लेकिन अदालत ने सबूतों को पर्याप्त मानते हुए यह दलील खारिज कर दी। कर्नाटक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने उनकी जमानत याचिकाएं नामंजूर कर दी थीं।


