टीआरपी डेस्क। अमेरिक के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हाथ धोकर पड़ भारत के खिलाफ गए हैं। उन्होंने भारत में रूस से तेल आयात करने के विरोध में भारत पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा की है। लेकिन, पूरी दुनिया जानती है कि अमेरिकी राष्ट्रपति का ये दोहरा रवैया है। अमेरिका और यूरोपियन देश खुद रूस से भारी मात्रा में तेल, गैस और फर्टिलाइजर्स खरीदते हैं। यूरोपीय संस्था CREA (सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर) ने भी एक खास रिपोर्ट में डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे की पोल खोल दी है।

खैर, अब भारत भी मन बना चुका है कि वह डॉनल्ड ट्रंप के इस दोगले व्यवहार के आगे नहीं झुकेगा। लंबे समय तक डॉनाल्ड ट्रंप की मनमानी के सामने चुप रहने के बाद भारत ने पिछले दिनों एक बयान जारी कर अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। इसके साथ ही भारत ने एक्शन लेना भी शुरू कर दिया है।

भारत का बड़ा एक्शन

इस ट्रैरिफ वार के बीच भारत ने एक बड़ा एक्शन लिया है। भारत ने अमेरिका के साथ एक बड़ी डील रद्द कर दी है। दरअसल, भारत ने अपनी नौसेना के लिए अमेरिका की बोइंग कंपनी से छह P-8I पोसेडन विमान खरीदने का सौदा किया था। ये विमान समंदर में निगरानी के लिए मंगवाए जा रहे थे। भारत के विशाल समुद्री क्षेत्र को देखते हुए नौसेना को ऐसे कई विमानों की जरूरत है। यह बेहद आधुनिक और उन्नत विमान हैं और अरब सागर से लेकर हिंद महासागर तक में चीन के बढ़ते प्रभाव पर नजर रखने के लिए भारत को इनकी बहुत जरूरत भी है। डिफेंस वेबसाइट IDRW की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने 3 अगस्त को किए गए इस सौदे को फिलहाल के लिए रोकने का फैसला किया है।

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नौसेना के पास 12 विमान

भारतीय नौसेना के पास पहले से ही ऐसे 12 विमान मौजूद है। भारत ने बोइंग कंपनी से 2009 में ये विमान खरीदे थे। तब अमेरिका से इन विमानों को खरीदने वाला भारत पहला अंतरराष्ट्रीय खरीददार बना था। 2008 में पहले 8 विमानों का सौदा हुआ। उस वक्त इसकी लागत करीब 2.2 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹19 हजार करोड़ आई थी।फिर 2016 में भारत ने ऐसे 4 और विमान खरीद। उनकी खरीदी पर करीब ₹8500 करोड़ खर्च हुए थे।

नौसेना के लिए ये विमान बेहद अहम

मई 2021 में अमेरिका, भारत को ऐसे 6 विमान के लिए तैयार हुआ। इस सौदे में करीब 2.42 अरब डॉलर (करीब ₹21 हजार करोड़) की लागत आने वाली थी। यह सौदा ईस्टर्न नेवल कमांड के लिए था। लेकिन, बाद के दिनों में लागत बढ़ने के कारण यह डील अटक गई। जुलाई 2025 तक इस सौदे की लागत बढ़कर 3.6 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹31,500 करोड़ हो गई। बावजूद इसके भारत सरकार इस साल फिर से इस डील को फाइनल करने करने वाली थी। P-8I पोसेडन विमान की क्षमता बेहद एडवांस है। इसमें एंटी शिप मिसाइल NASM-MR लगे है।इसकी रेंज 350 km है। यह हिंद महासागर में चीन के नौसैनिक गतिविधियों पर पैनी नजर रखने में बेहद कारगर है। लेकिन, अमेरिकी राष्ट्रपति के टैरिफ वार के चलते भारत ने इस सौदे पर फिर रोक लगा दी है।

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यदि इस डील को पूरी तरह रद्द किया जाता है तो यह अमेरिकी कंपनी बोइंग के लिए बड़ा झटका साबित होगी। बोइंग ने भारत में करीब 5,000 लोगों को रोजगार दिया है। वह भारत की अर्थव्यवस्था में 1.7 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹15 हजार करोड़ का कारोबार करती है।

इस डील को रोके जाने से भारतीय नौसेना की ताकत पर असर पड़ सकता है। इन विमानों का भारत के समुद्री क्षेत्र में सैकड़ों नौसैनिक जहाजों और 20 हजार मर्चेंट जहाजों की निगरानी की जाती है। हालांकि भारत खुद अपना निगरानी विमान बना रहा है। P-8I पोसेडन को खरीदने में भारी लागत को देखते हुए माना जा रहा है कि भारत अपने स्वदेशी विमान को प्राथमिकता दे सकता है। DRDO और HAL मिलकर भारत के लिए एडवांस विमान विकसित कर रहे हैं।