बिलासपुर। स्टेट बार काउंसिल चुनाव में पदाधिकारियों की भागीदारी को लेकर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इस मामले से जुड़े नियम पहले ही सार्वजनिक कर दिए जाने चाहिए थे, ताकि सभी को समय पर जानकारी मिल जाती।

‘चुनाव लड़ना है, तो पहले अपने पद से इस्तीफा देना होगा’

दरअसल, केंद्र सरकार ने 2022 में एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि जो वकील किसी बार एसोसिएशन में सचिव या अध्यक्ष जैसे पद पर हैं, वे स्टेट बार काउंसिल के चुनाव में उम्मीदवार नहीं बन सकते। वे केवल वोट डाल सकते हैं। अगर उन्हें चुनाव लड़ना है, तो पहले अपने पद से इस्तीफा देना होगा।

चुनाव से कई हो गए वंचित

इस नियम के कारण जिले, तहसील और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कई प्रमुख पदाधिकारी चुनाव लड़ने से वंचित हो गए। इसी का विरोध करते हुए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव वरुणेंद्र मिश्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। उनका कहना था कि वकीलों को इस नियम की जानकारी कभी नहीं दी गई और तीन साल तक सभी इससे अनजान रहे।

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चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि सूचना पहले सार्वजनिक होना जरूरी था, लेकिन अब चुनाव प्रक्रिया में दखल नहीं दिया जा सकता।