रायपुर। बस्तर क्षेत्र में विकास नहीं बल्कि विनाश हो रहा है। आदिवासियों को उनका वाजिब हक नहीं मिल रहा है, न जमीन का पट्टा, न बच्चों को शिक्षा, न गांवों में बिजली, न खेतों में पानी। अंग्रंेजों के जमाने में आदिवासी इलाकों में जो स्थितियां थी, सुदूर क्षेत्रों में आज भी वही स्थिति है। बस्तर में हिंसा के लिए नक्सली और सरकार दोनों ही जिम्मेदार हैं। नक्सली और सरकार के बीच की लड़ाई में भोलेभाले आदिवासियों और बस्तर के आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। हिंसा को बंदूक से खत्म नहीं किया जा सकता। शांति के लिए विचारों की हिंसा का खत्म होना जरूरी है।

यह कहना है लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष रघु ठाकुर का। नगरी, सिहावा में बस्तर क्षेत्र की सीमा में निवासरत आदिवासियों की मूलभूत समस्याओं की आवाज उठाने के लिए पहुंचे ठाकुर ने राजधानी रायपुर में आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि आदिवासी क्षेत्रों का विकास कम और विनाश ज्यादा हो रहा है। विकास का मतलब केवल आवागमन के लिए सड़कों का बनना अथवा फैक्ट्रियों का निर्माण होना ही नहीं है। उद्योगों में आदिवासी क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिलना चाहिए। 25 प्रतिशत हिस्सेदारी आदिवासियों की हो। आदिवासियों की संस्कृति की रक्षा की जाए, लालच के नाम पर हो रहे धर्मांतरण को रोका जाए, धर्मांतरण के नाम पर राजनीति बंद हो। अन्याय के बीज बोना बंद किया जाए। खेत, खलिहानों में सिंचाई के साधन उपलब्ध कराएं जाएं। धमतरी में अनेक बांध हैं, लेकिन आदिवासियों को खेती के लिए पानी नहीं मिल रहा। सलवा जुडूम के दौरान पलायन कर चुके हजारों लोगों को वापस लाकर पुनर्स्थापित किया जाए।

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आदिवासियों को नहीं मिल रहा पट्टा

2007 के अधिनियम में वर्णित है कि आदिवासी क्षेत्रों में यदि दो साल से कोई परिवार काबिज है तो उन्हें पट्टा मिलना चाहिए। लेकिन, इसके विपरीत 1987 से काबिज आदिवासियों को भी पट्टा नहीं दिया जा रहा है। एक दिन पूर्व ही पट्टे के लिए आदिवासियों ने प्रदर्शन किया तो प्रशासन के अधिकारी ज्ञापन लेने तक नहीं आए। आदिवासियों को त्वरित न्याय मिलना चाहिए।

शासन-प्रशासन को मानवीय बनाएं

लोसपा के अध्यक्ष रघु ठाकुर ने कहा कि सरकार केवल बंदूक के सहारे नक्सली क्षेत्रों में शांति स्थापना की सोच रही है। बंदूक की गोली से शांति की स्थापना नहीं हो सकती। इसके लिए शासन-प्रशासन के अधिकारियों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना होगा। क्योंकि जिन क्षेत्रों में नक्सलवाद का प्रभाव नहीं है, वहां भी विकास शून्य है। आम लोगों को सुविधाएं नहीं मिल रही है।