टीआरपी डेस्क। देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद ‘उपराष्ट्रपति‘ के लिए इस बार मुकाबला न केवल राजनीतिक, बल्कि भौगोलिक रूप से भी दिलचस्प बन गया है। BJP के नेतृत्व वाले NDA ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और वरिष्ठ नेता सीपी राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया है, वहीं विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारकर मुकाबले को रोमांचक बना दिया है।

दोनों ही प्रत्याशी दक्षिण भारत से हैं, राधाकृष्णन तमिलनाडु से जबकि रेड्डी आंध्र प्रदेश से आते हैं। ऐसे में यह मुकाबला अब “दक्षिण बनाम दक्षिण” के रूप में देखा जा रहा है।

देश को मिलेगा नया उपराष्ट्रपति

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के 21 जुलाई को इस्तीफा देने के बाद चुनाव आयोग ने उपराष्ट्रपति पद के लिए 9 सितंबर को मतदान की घोषणा की है। इसी दिन वोटों की गिनती भी की जाएगी और ये भी साफ हो जाएगा कि सीपी राधाकृष्णन और बी सुदर्शन रेड्डी में से कौन देश का अगला उपराष्ट्रपति होगा।

See also  योगाश्रम की आड़… नशे का कारोबार… योगी बाबा गिरफ्तार…

बहुमत का आंकड़ा ?

उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 782 सांसद मतदान के पात्र होते हैं। जीत के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 392 वोटों की आवश्यकता होगी। NDA के पास लोकसभा में 293 और राज्यसभा में 133 सांसद हैं। जिसका मतलब है NDA के पास 426 वोट हैं जिससे उनकी जीत लगभग पक्की है।

विपक्षी INDI अलायन्स के पास दोनों ही सदनों में सासंद कम है, जिसका सीधा मतलब है कि उनके पास वोटो की संख्या भी कम है। उपराष्ट्रपति चुनाव में INDI अलायन्स को क्रॉस वोटिंग या सहयोगी दलों से समर्थन की उम्मीद हैं, लेकिन समीकरण स्पष्ट रूप से NDA के पक्ष में है।

क्या कहता है इतिहास ?

पिछले उपराष्ट्रपति चुनावों पर नजर डालें तो यह स्पष्ट है कि जिस पार्टी की सरकार केंद्र में रही है, उसी पार्टी के उम्मीदवार ने भारी अंतर से जीत दर्ज की है। 2022 में जगदीप धनखड़ ने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को 74.37% वोटों के साथ हराया था, यह पिछले 3 दशकों की सबसे बड़ी जीत और विपक्ष की सबसे बड़ी हार थी।

See also  छत्तीसगढ़ के इन 59 अस्पतालों में अब नहीं चलेगा आयुष्मान कार्ड! रायपुर-दुर्ग के बड़े नाम बाहर, जाने से पहले देख लें लिस्ट

राजनीतिक जानकारों की राय

राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस बार का उपराष्ट्रपति चुनाव भी पहले की ही तरह संख्या बल पर आधािरत दिख रहा है। सत्ता पक्ष की संख्या बल के चलते विपक्ष के पास जीत की संभावना सीमित है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज को उम्मीदवार बनाकर विपक्ष ने एक मजबूत नैतिक संदेश देने की कोशिश की है।

निर्णायक बढ़त में NDA

जीत की रेखा NDA के पक्ष में स्पष्ट नज़र आ रही है, फिर भी विपक्ष द्वारा एक प्रतिष्ठित चेहरा उतारने से यह मुकाबला सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा और विचारधारा का सवाल भी बन गया है। अब 9 सितंबर को ही तय होगा कि देश का अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा, एक अनुभवी राजनेता या एक पूर्व न्यायाधीश ?