टीआरपी डेस्क। देश की राजधानी दिल्ली में गली-मोहल्लों, सड़कों पर रहने वाले कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम भेजने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने देशभर के लोगों को झकझोरकर रख दिया। डॉग लवर्स यानी कुत्तों की चिंता करने वालों ने कई दिनों तक प्रदर्शन कर विरोध जताया। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कुछ संशोधन किया, तब कहीं जाकर डॉग लवर्स ने राहत की सांस ली।
सुप्रीम कोर्ट ने केवल खूंखार डॉग को ही शेल्टर होम में रखने और अन्य डॉग की नसबंदी करके वापस छोड़ने का आदेश दिया। स्ट्रीट डॉग को सड़क से हटाकर शेल्टर होम भेजने के विरोध का मामला भले ही शांत पड़ गया हो। लेकिन, इस मुद्दे ने देशभर के पशु प्रेमियों को एक कर दिया। साथ ही आम लोग भी सोचने के लिए मजबूर हो गए थे कि यदि दिल्ली में आदेश लागू हो गया होता तो देश के अन्य शहरों में क्या हालत होती। क्योंकि, अनेक राज्यों में जब पालतू डॉग का इलाज ठीक ढंग से नहीं हो पाता है तो गली-मोहल्लों में रहने वाले आवारा डॉग का इलाज और पालन पोषण भला किस तरह से होता। छत्तीसगढ़ में तो एक भी डॉग शेल्टर हाउस नहीं है। यहां तक कि एक भी ढंग का सरकारी अस्पताल नहीं है। सुविधाएं न होने से डॉग पालकों को प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
सरकारी हॉस्पिटल की हालत खस्ता
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पंडरी इलाके में सरकारी पशु चिकित्सालय है, यहां ज्यादातर लोग अपने पालतू पशुओं का इलाज कराने पहुंचते हैं। इस खस्ताहाल अस्पताल में वे ही लोग अपने पालतू पशु को लेकर आते हैं जो प्राइवेट अस्पताल का खर्चा उठाने में सक्षम नहीं होते। अस्पताल में न तो पर्याप्त वेटनरी डॉक्टर है और न ही स्टॉफ। कुछ डाक्टर और एकाध कंपाउंडर के भरोसे जैसे-तैसे पशुओं का इलाज किया जाता है।
स्वयं सफाई करते हैं पालक
सरकारी अस्पताल में बीमारी से ग्रस्त बेजुबान पशु यदि शौच, पेशाब कर ले तो पशुओं को लेकर आने वाले लोगों को स्वयं साफ करना पड़ता है, क्योंकि स्वीपर, सफाई कर्मचारी कहीं नजर ही नहीं आते। राज्य की राजधानी के पशु अस्पताल में जब यह हालत है तो दूरदराज के गांवों, शहरों की क्या हालत होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
डेढ़ करोड़ में बना डॉग शेल्टर हाउस को उद्घाटन का इंतजार
आवारा डॉग को रखने के लिए प्रदेश में एकमात्र राजधानी में शेल्टर हाउस का निर्माण किया गया है। टाटीबंध से भनपुरी जाने वाले रिंग रोड के समीप सोनडोंगरी गांव में नगर निगम ने डेढ़ करोड रुपए की लागत से डॉग शेल्टर होम का निर्माण किया है। लेकिन, पर्याप्त सुविधाएं न होने से शेल्टर होम का उद्घाटन तक नहीं किया जा सका है। इस होम में गंभीर बीमारी से ग्रस्त डॉग को रखकर इलाज किया जाना है। वर्तमान में आवारा डॉग का कहीं इलाज न होने से डॉग या तो पागल हो जाता है, या उस डॉग की तड़़प-तड़पकर जान निकल जाती है।
150 डॉग की व्यवस्था होगी
जोन कमिश्नर राजेश्वरी पटेल का कहना है कि डॉग शेल्टर हाउस का कार्य पूरा हो चुका है। यहां लगभग 150 डॉग रखकर इलाज किया जा सकेगा। 5 बाई 4 के करीब 75 सेल बनाए गए हैं। जल्द ही एनजीओ को जिम्मेदारी दी जाएगी। कुछ उपकरण लाए जाने हैं, आपरेशन थियेटर में नसबंदी, बीमार कुत्तों का इलाज, ऑपरेशन किया जाएगा।


