ग्वालियर: मध्यप्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। जहां कांग्रेस अक्सर अंतर्कलह को लेकर सुर्खियों में रहती है, वहीं अब भाजपा के अंदर भी अफसरशाही के खिलाफ नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। भाजपा के वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव ने एक आबकारी अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है और कार्रवाई की मांग की है।

कांग्रेस प्रत्याशी को मदद का आरोप

गोपाल भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को 2 जून को पत्र लिखकर सहायक आयुक्त, आबकारी विभाग राकेश कुर्मी को हटाने की मांग की है। विधायक का आरोप है कि अधिकारी ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति पटेल को शराब और नकदी के माध्यम से मदद पहुंचाई थी।

पत्र में भार्गव ने लिखा कि अधिकारी ने पद का दुरुपयोग करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी को चुनाव में सहायता दी, जो चुनाव आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन है। अब यह पत्र सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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अफसरशाही हावी, मुख्यमंत्री को लिखना पड़ा पत्र

इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर प्रदेश में अफसरशाही के बढ़ते दखल पर सवाल खड़े हो रहे हैं। भाजपा विधायक की ओर से सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग यह दर्शाता है कि जनप्रतिनिधियों की बातों को अफसर गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

विधायक के इस पत्र से यह संदेश भी गया है कि सत्तारूढ़ दल के भीतर भी अंदरूनी असहमति और प्रशासनिक नियंत्रण की चुनौतियाँ हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।