रायपुर। बस्तर के शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भर्ती की जांच में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। जांच कमेटी ने उच्च शिक्षा सचिव को रिपोर्ट सौंपी है। खास बात यह है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही शिक्षकों ने ज्वाइनिंग दे दी है। अब जिन शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ी पाई गई है, उन्हें हटाने की अनुशंसा की जा रही है।

शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर में शिक्षकों की भर्ती में अनियमितता का मामला सुर्खियों में रहा है। विश्वविद्यालय में 59 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किए गए थे। यह शिकायत सामने आई कि यूजीसी के नियमों को ताक पर रखकर भर्ती हुई।

विधानसभा में चर्चा में आया था मामला

विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला प्रमुखता से उठा था। इस पर सीएम विष्णु देव साय ने एडिशनल डायरेक्टर जीके खैरवार की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति के गठन की घोषणा की थी। सूत्रों के मुताबिक खैरवार कमेटी ने पखवाड़े भर पहले ही शिकायतों की जांच कर रिपोर्ट उच्च शिक्षा विभाग को भेज दी।

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यह भी बात सामने आई है कि जांच में यूजीसी के भर्ती नियमों को नजरअंदाज किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को लिख रहा है। मगर सभी चयनित शिक्षकों ने ज्वाइनिंग दे दी है।

बताया गया कि जांच समिति को हफ्ते भर के भीतर रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन कमेटी के गठन का आदेश विलंब से जारी हुआ। इसके बाद कमेटी के सदस्यों ने विश्वविद्यालय में जाकर जानकारी ली और विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष लिया गया। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर शिक्षकों को हटाना, और चयन समिति पर कार्रवाई करना आसान नहीं है।

यह मामला विधानसभा में भाजपा सदस्य अजय चंद्राकर ने उठाया था कि यूजीसी-2018 के नियमों को नजरअंदाज कर शिक्षकों की भर्ती की गई है। इसमें आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं किया गया है। यह भी शिकायत हुई थी कि 50 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति की भी नियुक्ति कर दी गई है। चयनित अभ्यर्थी प्रदेश के बाहर के हैं। बहरहाल, यह मामला तूल पकड़ सकता है।

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