रायपुर रेल मंडल के सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर (DCM) अवधेश कुमार त्रिवेदी और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अन्य अधिकारियों के खिलाफ सीआईडी में एफआईआर दर्ज हुई है। यह एफआईआर उड़ीसा के एडवोकेट आनंद कुमार शर्मा ने दर्ज कराई है।

कमर्शियल स्टाफ की मांगी थी जानकारी

यह मामला रायपुर आरक्षण केंद्र में पदस्थ कमर्शियल स्टाफ कल्पना स्वामी से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उन्होंने आरटीआई (सूचना का अधिकार) के तहत कल्पना स्वामी से संबंधित जानकारी मांगी थी, लेकिन जो जानकारी उन्हें प्रदान की गई, वह कथित तौर पर गलत थी। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने सीआईडी में शिकायत दर्ज कराई।

जानकारी के मुताबिक, यह एफआईआर उड़ीसा के कटक में धारा 173(1) बीएनएसएस-2023 के तहत दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि आरटीआई कानून का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। जब गलत जानकारी दी जाती है तो यह कानून की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की इस लापरवाही के कारण उन्हें कानूनी कार्रवाई करनी पड़ी।

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इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद रायपुर रेल मंडल में हलचल मच गई है। मंडल के कई अफसरों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो यह मामला बड़े स्तर पर कार्रवाई तक जा सकता है।

सीनियर डीसीएम अवधेश कुमार त्रिवेदी ने इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है। उन्होंने केवल इतना कहा कि उन्हें एफआईआर की जानकारी मिली है और वे कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद ही कोई अगला कदम उठाएंगे।

सीआईडी अब इस मामले की गहराई से जांच करेगी। जांच में यह देखा जाएगा कि आरटीआई के तहत गलत जानकारी क्यों और किन परिस्थितियों में दी गई, और इसमें किन-किन अधिकारियों की भूमिका रही। रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि इस तरह के विवाद मंडल की साख पर असर डाल सकते हैं और इसलिए इस मामले का निष्पक्ष समाधान होना जरूरी है।

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फिलहाल सभी की नजरें सीआईडी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि क्या आरोप सही हैं और क्या संबंधित अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होती है।