प्रतापपुर। एसईसीएल की कोयला परियोजना के लिए सूरजपुर जिले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज़ होते ही प्रतापपुर इलाके में दलालों के बीच होड़ मच गई है। जहां एक ओर किसान अपनी पुश्तैनी ज़मीन के बदले मिलने वाले मुआवज़े को लेकर चिंतित हैं, वहीं दूसरी ओर राजस्व विभाग पर गंभीर आरोप लग रहे हैं।
लीक हो गई अधिसूचना की जानकारी..?
बताया जा रहा है कि अधिसूचना की जानकारी पहले से ही लीक हुई और उसी का फायदा उठाकर कुछ अधिकारी कर्मचारियों व उनके नज़दीकी लोगों ने अधिग्रहण से पहले ही ज़मीनें खरीद डालीं। अब वही ज़मीनें मुआवज़े की सूची में शामिल होकर मोटी रकम दिलाने वाली है। इसके लिए दलाल भी सक्रिय हो गए हैं।
ये हैं खदान प्रभावित गांव
कोयला परियोजना में दूरती, मरहटा, सेंधोपारा, जरही, बंशीपुर, बोझा, मयापुर-2, जगन्नाथपुर, मदन नगर और कनक नगर जैसे कई गांवों की जमीनें ली जानी हैं। इनमें से कुछ ग्रामों में धारा-9 पहले ही लागू हो चुकी है, जिससे अधिग्रहण प्रक्रिया कानूनी रूप से और मज़बूत हो गई है।
अधिग्रहण से पहले कुछ जमीनों को कैसे किया गया शामिल..?
सूत्रों के मुताबिक, इन इलाकों में कई रकबों का प्रारंभिक मुआवज़ा निर्धारण हो चुका है और कुछ जमीनों की मुआवज़ा राशि भी बन गई है। मगर अधिसूचना से ठीक पहले खरीदी गई जमीनों को सूची में शामिल किया जाना सवाल खड़े कर रहा है। ऐसा बिना राजस्व अमले और SECL के अफसरों की मिलीभगत के संभव नहीं है।
कानून में क्या हैं प्रावधान..?
भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 और कोल बेयरिंग एरियाज अधिनियम 1957 साफ कहते हैं कि अधिसूचना के बाद भूमि का कोई भी लेन-देन शून्य माना जाएगा। यदि अधिसूचना से पहले गोपनीय जानकारी लीक कर जमीन खरीदी गई है, तो यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, बेनामी संपत्ति निषेध अधिनियम और आईपीसी की धारा 420 व 409 के तहत गंभीर अपराध है।
उठने लगी है जांच की मांग
सूत्रों का कहना है कि यदि उच्च स्तरीय जांच हो तो विभागीय कर्मचारियों और बाहरी लोगों की मिलीभगत साफ तौर पर उजागर हो सकती है। इलाके के जागरूक लोग और जन प्रतिनिधि इस मामले की जांच की मांग करने लगे हैं। जब यह बात मीडिया तक पहुंची तो इलाके के जिम्मेदार अफसर अपना फोन स्विच ऑफ कर जवाब देने से बचने की जुगत में लग गए हैं।
गौरतलब है कि इससे पूर्व भी धर्मजयगढ़, लारा, रायपुर समेत कई अन्य जिलों में इसी तर्ज पर करोड़ों का जमीन घोटाला उजागर हो चुका है। इनमें से कुछ की जांच भी चल रही है, मगर जांच की धीमी गति से ऐसा नहीं लगता कि कोई बड़ी कार्यवाही हो सकेगी। यही वजह है कि नई परियोजनाओं में भी घोटाले की पटकथा लिखी जाने लगी है। देखना है कि मुख्यमंत्री के सरगुजा संभाग में हो रहे इस घोटाले को जिम्मेदार अफसर संज्ञान में लेते हैं, या फिर यह यूं ही बदस्तूर चलता रहेगा।


