0 जियो टैगिंग में भी चल रहा है खेल
धरमजयगढ़। गरीबों को पक्का आवास मुहैया कराने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना धांधली और लापरवाही की गिरफ्त में फंसती दिख रही है। अब तक प्रदेश के कई इलाकों में पीएम आवास निर्माण में घोटाले उजागर हो चुके हैं। ताजा मामला धरमजयगढ़ जनपद पंचायत का है जिसके अंतर्गत ग्राम पंचायत बोकरामुड़ा में कोटवार पंचो बाई महंत को आवास स्वीकृत तो हुआ, लेकिन नींव तक नहीं डाली गई, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में घर को पूरा बनाया जाना दिखा दिया गया है।
इस तरह मामला हुआ उजागर
रिलो गाँव की निवासी पंचो बाई महंत को इस योजना के तहत 2024 में 1.20 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। यह राशि तीन किश्तों में जारी की जानी थी। दो किश्तें पहले ही निकाली जा चुकी थीं और जियो-टैगिंग के जरिए सिस्टम में घर को पूरा बता दिया गया था। हालांकि, ग्रामीणों की शिकायत पर पता चला कि कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ था, नींव भी नहीं डाली गई थी। हैरानी की बात यह है कि जियो-टैगिंग के जरिए किसी और व्यक्ति के घर को पंचो बाई का घर बता दिया गया।
लाभार्थी ने दी ये सफाई
पंचो बाई ने बताया कि रिलो गाँव में उनकी कोई ज़मीन नहीं है, इसलिए उन्होंने अपने दामाद के गाँव नरकालो में निर्माण कार्य शुरू कर दिया। इससे यह सवाल उठता है कि क्या इस योजना के तहत एक गांव के लिए स्वीकृत आवास दूसरे गाँव में बनाया जा सकता है?
ग्रामीणों और पंचायत ने की आपत्ति
ग्रामीणों और पंच सदस्यों ने तर्क दिया कि अगर लाभार्थी के पास जमीन नहीं थी, तो उसे पंचायत को सूचित करना चाहिए था। पंचायत जमीन उपलब्ध करा सकती थी। उन्होंने यह भी पूछा कि कोटवार ने कोटवारी की जमीन का इस्तेमाल क्यों नहीं किया, जो आमतौर पर इस पद के लिए आवंटित होती है।
ज़िम्मेदारी से बच रहे सरपंच और आवास सहायक
गांव के सरपंच श्याम कुमार राठिया ने अपनी सफाई में कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है और जियो-टैगिंग से पहले उनकी राय नहीं ली जाती। हालंकि, उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने कोटवार के लिए पहले जियो-टैगिंग का सुझाव दिया था। दूसरी ओर, आवास सहायक अंजू भगत ने कहा कि उन्होंने सरपंच के निर्देश पर जियो-टैगिंग की थी। ऐसे में दोनों अपनी जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना भौतिक सत्यापन के धनराशि कैसे जारी कर दी गई। क्या अधिकारियों ने सिर्फ़ कागज़ों पर ही सब कुछ मंज़ूर कर दिया? चूँकि अंजू भगत पाँच पंचायतों में आवास निर्माण कार्य की ज़िम्मेदारी संभाल रही हैं, इसलिए संदेह है कि क्या अन्य गांवों में भी इसी तरह की अनियमितताएँ हो रही हैं।प्रधानमंत्री आवास योजना में इस अनियमितता ने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि क्या इस मामले की जांच और कार्रवाई होती है या यह भी अन्य भ्रष्टाचार के मामलों की तरह चुपचाप दबकर रह जाता है।



