टीआरपी डेस्कVishwakarma Puja 2025: विश्वकर्मा पूजा आज मनाई जा रही है। इस बार पूजा में इंदिरा एकादशी, कन्या संक्रांति, बुधवार व्रत, परिघ योग, पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। भगवान विश्वकर्मा, जो सृष्टि के प्रथम शिल्पकार और वास्तुकार माने जाते हैं। उनकी पूजा से कार्यों में सफलता, औजारों-मशीनों की सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है। इस दिन औजार, मशीन, कलम, दवात, बहीखाता और वाहनों की पूजा की जाती है।

भगवान विश्वकर्मा कौन हैं?

मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा ने सृष्टि का पहला मानचित्र बनाया था। उन्होंने स्वर्गलोक, यमपुरी, कुबेर की अलका पुरी, द्वारका नगरी और सोने की लंका का निर्माण किया। इसके अलावा, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, भगवान शिव का त्रिशूल, इंद्र का वज्र समेत कई दिव्य अस्त्र-शस्त्र और देवालय, महल, रथ आदि उनके द्वारा बनाए गए हैं।

विश्वकर्मा पूजा की सामग्री

पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:

  • भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या फोटो
  • लाल या पीला कपड़ा
  • लकड़ी की चौकी
  • धूप, दीप, अक्षत्, चंदन
  • पंचामृत, नैवेद्य, मौसमी फल, मिठाई
  • नारियल, पान का पत्ता, सुपारी, इलायची, लौंग
  • हवन सामग्री, आम के पत्ते
  • कलम, दवात, नया बहीखाता
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पूजा विधि

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल पर लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
  • भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या फोटो स्थापित करें।
  • दीप, धूप जलाएं और अक्षत्, चंदन, फूल अर्पित करें।
  • पंचामृत और नैवेद्य का भोग लगाएं।
  • औजार, मशीन, वाहन, कलम, दवात, बहीखाता आदि की पूजा करें।
  • विश्वकर्मा मंत्र “ॐ विश्वकर्मणे नमः” का जाप करें।
  • हवन करें और आरती के साथ पूजा संपन्न करें।

पूजा का महत्व

विश्वकर्मा पूजा कार्यस्थल और औजारों की सुरक्षा के लिए विशेष महत्व रखती है। इस दिन पूजा करने से व्यवसाय में वृद्धि, कार्यों में सफलता और आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है। छह शुभ संयोगों के साथ यह पूजा और भी फलदायी मानी जा रही है।