टीआरपी डेस्क। Mobile Number : आज हर किसी की जिंदगी मोबाइल नंबर से जुड़ी हुई है। चाहे बैंकिंग हो, आधार कार्ड, सोशल मीडिया या किसी भी तरह की ऑनलाइन सर्विस हर जगह मोबाइल नंबर जरूरत पड़नी तय बात है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर मोबाइल नंबर 10 अंकों का ही क्यों होता है और हमारे मोबाइल नंबर के आगे हमेशा +91 क्यों लिखा होता है ? आइए जानते हैं, क्यों भारत का हर मोबाइल नंबर 10 अंको का ही क्यों है और हर नंबर के पहले +91 क्यों लगाया जाता है।

10 अंकों का ही नंबर क्यों ?

मोबाइल नंबर का पहला अंक हमेशा 9, 8, 7 या 6 से शुरू होता है। इससे पता चलता है कि यह नंबर किस मोबाइल नेटवर्क का है। अब अगर आप 10 अंकों को देखें तो यह लगभग 100 करोड़ (1 बिलियन) अलग-अलग नंबर कॉम्बिनेशन बनाने की क्षमता रखता है।

भारत जैसी बड़ी आबादी वाले देश में भी यह क्षमता काफी है। यदि नंबर 8 अंकों के होते तो सीमित कॉम्बिनेशन मिलते और भविष्य में नंबर की कमी पड़ सकती थी। वहीं अगर 12 या 13 अंकों के होते तो लोगों के लिए नंबर याद रखना मुश्किल हो सकता है, इसलिए 10 अंक सबसे संतुलित और बेहतर विकल्प माना गया है। यही वजह है कि भारत में सभी को 10 अंकों का मोबाइल नंबर ही जारी किया जाता है।

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ITU और TRAI की भूमिका

दरअसल +91 कोई रैंडम नंबर नहीं है, बल्कि यह भारत का अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग कोड (International Calling Code) है। इस छोटे से कोड के पीछे एक लंबा और काफी रोचक इतिहास है। +91 को तय करने का काम अंतरराष्ट्रीय टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) ने किया था। ITU यूनाइटेड नेशंस (UN) की एक स्पेशल एजेंसी है जो पूरी दुनिया में सूचना और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजीज को संभालती करती है।

ITU ने दुनिया के सारे देशों को 9 जोन में बांट रखा है और हर देश का अपना अलग-अलग फोन कोड होता है। जैसे हर घर का अपना पता होता है, वैसे ही ये कोड हर अंतरराष्ट्रीय कॉल को सही जगह पहुंचाने में काम आता है। भारत 9वें जोन में आता है, जहां कुल 14 देश शामिल हैं और हर देश का कोड अलग है। भारत का यह कोड ’91’ है।

ऐसे ही भारत में मोबाइल नंबर को लेकर नियम TRAI (Telecom Regulatory Authority of India) और DoT (Department of Telecommunications) बनाते हैं। जब मोबाइल सेवाएं शुरू हुईं, तब यह तय किया गया कि पूरे देश में एक समान लंबाई के मोबाइल नंबर होने चाहिए ताकि यूजर्स की पहचान आसान हो और नेटवर्क मैनेजमेंट में दिक्कत न आए। इसके लिए 10 अंकों का फॉर्मेट तय किया गया था।

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भारत का कोड +91 क्यों है ?

दुनिया के सारे देशों को अलग-अलग जोन में बांटा गया है और भारत 9वें जोन में आता है। इसलिए इस जोन का पहला नंबर 9 रखा गया। उसके पीछे 1 जोड़कर भारत का कोड +91 बना दिया गया। इसी तरह, इसी जोन में पाकिस्तान का कोड +92, अफगानिस्तान का +93, श्रीलंका का +94 है और बाकी देशों को भी उनके-अपने कोड दिए गए हैं।

मोबाइल नंबर के हर अंक की अपनी पहचान

आपके मोबाइल नंबर के हर अंक का अपना अलग मतलब है, मान लें कि आपका नंबर +91 77777-00000 है तो शुरुआत का +91 तो देश का कॉलिंग कोड है, जिससे कॉल किस देश में लगाना है तय निर्धारित होता है। इसके बाद के 2 अंक एक्सेस कोड होते हैं। इसके बाद आने वाले 3 अंक सर्विस प्रोवाइडर का कोड बताते हैं, यानि कॉलिंग के समय किस कंपनी के नंबर से संपर्क साधना है और इसके बाद आखिरी के 5 नंबर आपके सब्सक्राइबर कोड को दर्शाते हैं, जिससे क्षेत्र के हिसाब से फोन कॉल्स को कनेक्ट किया जाता है।

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Mobile Number : मोबाइल नंबर के सहारे अलग-अलग कोड्स को जोड़ते हुए ही कॉलिंग लगाना संभव हो पाता है और हम सही समय पर सही जगह में कॉल लगा पाते हैं। वैसे ही देश के सही चयन के लिए अंतर्राष्ट्रीय कोड़ जो भारत का +91 है उसे आगे लगाना जरूरी है।