टीआरपी डेस्क। नवरात्रि भारतीय संस्कृति में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का महापर्व है। इस दौरान मां की सवारी का विशेष महत्व होता है, जो ज्योतिषीय आधार पर तय होती है। मां दुर्गा विभिन्न वाहनों जैसे हाथी, घोड़ा, पालकी या नाव पर सवार होकर आती हैं, और प्रत्येक सवारी भविष्य के संकेत देती है।
नवरात्रि और माता की सवारी का ज्योतिषीय आधार
नवरात्रि की शुरुआत जिस दिन होती है, उसी के आधार पर मां की सवारी निर्धारित होती है:
- सोमवार और रविवार: मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं, जो सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा का संकेत देता है।
- शनिवार और मंगलवार: घोड़े पर सवारी युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता या प्राकृतिक आपदा का प्रतीक है।
- गुरुवार और शुक्रवार: पालकी पर आगमन सुख-शांति और समृद्धि की वृद्धि दर्शाता है।
- बुधवार: नाव पर सवारी शुभ मानी जाती है, जो भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति का संकेत देती है।
माता की वापसी की सवारी
नवरात्रि के अंतिम दिन, विजयादशमी को मां की वापसी की सवारी भी दिन के आधार पर तय होती है:
- रविवार और सोमवार: भैंसे पर वापसी, जो दुख और रोग का संकेत देती है।
- मंगलवार और शनिवार: मुर्गा पर वापसी।
- बुधवार और शुक्रवार: हाथी पर वापसी, जो सुख-समृद्धि लाती है।
- गुरुवार: नर वाहन (पालकी) पर वापसी।
इस बार माता की सवारी
पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि 2025 की शुरुआत 22 सितंबर यानी कि सोमवार को होगी। इस दिन मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी, जो भरपूर वर्षा और खुशहाली का संकेत देता है।
पौराणिक कथाओं में सवारी का महत्व
मां दुर्गा की सवारी का महत्व केवल ज्योतिषीय गणना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी पौराणिक मान्यताएं भी हैं। मां का मुख्य वाहन शेर शक्ति और साहस का प्रतीक है, जबकि नवरात्रि के दौरान बदलती सवारियां ब्रह्मांड के चक्र और प्रकृति के स्वरूप को दर्शाती हैं।


